छोटी कहानियों में बड़े अर्थ

रश्मि चौधरी का लघुकथा संग्रह ‘संवेदनाओं का स्पर्श’ समकालीन हिंदी लघुकथा को एक नई चेतस दिशा प्रदान करता है। ये लघुकथाएं केवल आक्रोश, टकराव या विरोध का आख्यान नहीं हैं, बल्कि इनमें मानवीय सहकार, संवेदनात्मक विस्तार और यथार्थ का सधा हुआ समन्वय देखने को मिलता है। संग्रह की रचनाएं जीवन के छोटे-छोटे प्रसंगों को बड़ी आत्मीयता और वैचारिकता के साथ प्रस्तुत करती हैं। कभी मनोविज्ञान की परतें खुलती हैं, तो कभी समाजशास्त्रीय संदर्भों का मूक आकलन होता है। ‘दुकानदारी’, ‘अन डू’, ‘सम्मान’, ‘मान्यताएं’ जैसी लघुकथाएं अपनी गहनता और प्रतीकों के माध्यम से पाठक के मन को छू जाती हैं। लेखिका की भाषा-संरचना और कथ्य विन्यास लघुकथा को संवेदना की ऐसी धरती पर स्थापित करते हैं, जहाँ विचार और अनुभूति दोनों का संतुलन है।”

Read More

…जब एक अफवाह ने हिला दिया था महू को

27 साल पहले महू के सात रास्ता स्कूल में एक टाइम बम मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया था। संसाधनों की कमी और अफरा-तफरी के बीच प्रशासन, पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने जिस सूझबूझ से हालात को संभाला, वह आज भी यादगार बन गया है। घटना से जुड़े तत्कालीन अधिकारी आज भी इसे याद करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

Read More

आस्था में विश्‍वास

भारत की आध्यात्मिक परंपराएं समय के साथ बदलती जरूर रही हैं, पर उनकी आत्मा आज भी उतनी ही जीवंत और शक्तिशाली है। इसका प्रमाण राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर है, जो केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और भक्ति का जीवंत केन्द्र बन चुका है। विशेषकर निर्जला एकादशी और द्वादशी के पावन पर्व पर यहां आस्था का ऐसा महासंगम होता है, जो किसी भी श्रद्धालु के हृदय को अद्वितीय शांति और ऊर्जा से भर देता है।

Read More

पोहे : स्वाद, परंपरा और देसी दिलों का मिलन

पोहे तो पोहे हैं — एक ऐसा देसी नाश्ता जो न केवल पेट भरता है, बल्कि दिल भी जीत लेता है। खासकर जब बात हो मराठी कांदा-बटाटे पोहे की, तो फिर स्वाद की बात ही कुछ और होती है। राई, कड़ी पत्ता, प्याज, मूंगफली, नींबू और ऊपर से नारियल की सजावट — हर कौर में बस आनंद ही आनंद। चाहे दडपे पोहे हों या मिसळ पोहे, एक्सपेरिमेंट भले होते रहें, पर असली प्रेम तो उसी ऑथेंटिक स्वाद से है। मराठी शादियों में भी पोहे-चाय की रस्म दिलों को जोड़ने का माध्यम बनती है। आज का दिन कुछ देसी हो जाए

Read More

कश्मीर की तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों से अधूरी रह रही कश्मीर यात्रा की इच्छा इस बार पूरी हुई। गर्मियों की छुट्टियों में जब शर्ली और जेमी दोनों घर पर थे, तो परिवार ने दृढ़ निश्चय किया — अबकी बार कश्मीर पक्का! २१ मई को हमने जम्मू के लिए ट्रेन पकड़ी और वहां से शुरू हुआ श्रीनगर की ओर रोमांचक सफर, जिसमें चेनानी-नाशरी सुरंग की तकनीकी भव्यता और घाटियों की नैसर्गिक सुंदरता ने मन मोह लिया। रास्ते की कठिनाइयों के बावजूद श्रीनगर की समतल घाटी का सौंदर्य जैसे हर थकान को हर लेता है। होटल अल-शिमाघ में गर्मजोशी से स्वागत के बाद शुरू हुई हमारी असली कश्मीरी यात्रा — डल झील, मुगल बाग, लाल चौक और हिमालयी सौंदर्य से सराबोर सोनमर्ग, गुलमर्ग, पहलगाम की रोमांचकारी यात्राएं।

Read More

जीवन एक- वचन नहीं है

जीवन एक-वचन नहीं है। यह दो पत्थरों के रगड़ से जन्मी आग की तरह है—जहाँ दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे को प्रकाशित करता है। यह टकराहट नहीं, रचना है। हम सबके अनुभव अलग हैं, फिर भी जुड़ाव की ज़रूरत अपरिहार्य है। पर आज, हम सिर्फ़ व्यूज में हैं, अंतर्बोध में नहीं। जो घटित हो रहा है, वह केवल घटना नहीं, संवेदना है—लेकिन हम ठहरते नहीं, स्क्रॉल करते जाते हैं।

Read More
सुबह की रोशनी में दीवार के कोने में जाल बुनती मकड़ी, पास में खिड़की से आती हल्की धूप

उम्मीद के जाल में उलझी मैं

“हां……
यही तो करती हूँ मैं भी हर दिन ….
हर सुबह मैं भी तो ढेरों उम्मीद,
कुछ ख्वाबों-ख्वाहिशों का लेकर
ताना-बाना,
बुनने लगती हूँ अनवरत
एक जाल भीतर अपने l”

Read More
एक पर्यावरणविद् मंच पर भाषण देते हुए, पीछे लक्ज़री कार का दृश्य

वे बेचारे……

यह व्यंग्यात्मक लेख आधुनिक समाज में बढ़ते दिखावटी पर्यावरणवाद और नैतिक पाखंड पर तीखा प्रहार करता है। कहानी एक ऐसे गुरुजी से शुरू होती है, जो गांव की पाठशाला में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और सादगी का पाठ पढ़ाते हैं। उनके आदर्श, उनके विचार और उनका जीवन सब कुछ इतना प्रभावशाली होता है कि लोग उन्हें भगवान जैसा मानने लगते हैं।

Read More
हरा-भरा पेड़ जिसकी शाखाओं पर पक्षी बसेरा किए हुए हैं

मैं प्रकृति हूँ

“प्रकृति स्वयं कहती है—मैं ही इस धरती की शोभा हूँ, जीवन का मूल आधार हूँ। मेरी कोमल शाखाएँ, मेरी छाया, मेरे फूल-पत्ते सभी जीवों के लिए आश्रय और सहारा हैं। जब कोई निराश होता है, मैं उसे आशा देती हूँ; जब कोई भूखा-प्यासा होता है, मैं उसकी भूख-प्यास मिटाती हूँ।

Read More