अधूरी परवाह

राघव और रिद्धिमा की लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में फोन पर भावुक बातचीत का दृश्य।

सुरेश परिहार, पुणे

यह सुनकर राघव कुछ पल के लिए चुप हो गया. शब्द बहुत छोटे थे, लेकिन उनके भीतर न जाने कितने सवाल छिपे थे. उसे थोड़ा बुरा भी लगा. आखिर वह तो आज भी उसी तरह रिद्धिमा से प्रेम करता था.लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते की शुरुआत में एक वादा किया था.हमारे बीच चाहे कैसी भी बात हो, हम उसे बातचीत से सुलझाएँगे. मन में कोई मैल नहीं रखेंगे..
इसी वादे को निभाने के लिए एक सुबह राघव ने रिद्धिमा को कॉल किया.
सच-सच बताओ, क्या मैं सच में बदल गया हूँ? उसकी आवाज़ में हल्की-सी उदासी थी.उधर कुछ क्षणों तक सन्नाटा रहा. फिर रिद्धिमा ने बहुत धीमे से कहा-
राघव, जब मैं कहती हूँ कि तुम बदल गए हो, तो उसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि तुम अब मुझसे प्यार नहीं करते. मुझे पता है, तुम आज भी वही हो… और मेरे दिल में तुम्हारी जगह भी आज वैसी ही है जैसी पहले थी..राघव चुपचाप सुनता रहा.
रिद्धिमा आगे बोली-.लेकिन जानते हो, रिश्तों में बदलाव हमेशा बड़े कारणों से नहीं आता. कभी-कभी कुछ छोटी-छोटी बातें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं… और उनका खालीपन बहुत बड़ा लगने लगता है..
उसकी आवाज़ में शिकायत नहीं थी, बस एक हल्की-सी उदासी थी.
हम दोनों लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हैं, राघव. हमारे बीच न रोज़ मिलना है, न साथ बैठकर चाय पीना, न अचानक हाथ थाम लेना और न ही नाराज़ होने पर सामने बैठकर मना लेना..
हमारे पास अगर कुछ है… तो वह हैं…बातें, इंतज़ार और एक-दूसरे की परवाह का एहसास..फिर वह मुस्कुराई और बोली
याद है, पहले तुम बिना वजह पूछ लिया करते थ. खाना खाया?
मेरे उदास होने पर कहते थे …क्या हुआ, सब ठीक है?और रात को हमेशा कहते थेसो जाना, ज़्यादा देर तक मत जागना..
शायद ये बातें बहुत छोटी लगती हों, लेकिन मेरे लिए यही तुम्हारा साथ थीं. यही मेरा तुम्हारे करीब होना था. राघव की आँखें नम होने लगी थीं. जब ये छोटी-छोटी बातें कम होने लगीं, तब मुझे लगा कि तुम बदल गए हो..
फिर रिद्धिमा ने खुद ही उसकी तरफदारी करते हुए कहा
असल में, तुम नहीं बदले थे. बस तुम्हारी ज़िम्मेदारियाँ बढ़ गई थीं, काम बढ़ गया था और शायद तुमने सोचा कि अब इन छोटी बातों की ज़रूरत नहीं रही..
लेकिन रिश्तों में सबसे ज़्यादा ज़रूरत इन्हीं छोटी बातों की होती है.. लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में प्रेम सिर्फ आई लव यू कहने से नहीं चलता. यह उस एक संदेश से चलता है, जिसमें लिखा होता हैघर पहुँच गए?
यह उस कॉल से चलता है, जो सिर्फ यह पूछने के लिए की जाती हैआज दिन कैसा रहा? और यह उस एक वाक्य से चलता हैमैं तुम्हारे साथ हूँ.
कुछ देर तक दोनों तरफ खामोशी रही.
फिर रिद्धिमा ने बहुत धीरे से कहा- मैं तुमसे शिकायत नहीं कर रही, राघव. मैं बस तुम्हें यह बताना चाहती हूँ कि प्रेम बड़े उपहारों और बड़े वादों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों से ज़िंदा रहता है. किसी का पसंदीदा गाना याद रखना, उसकी थकान को बिना बताए समझ लेना, अचानक एक संदेश भेज देना, बिना वजह हाल पूछ लेना… यही किसी रिश्ते की सबसे बड़ी पूँजी होती हैं..
इसलिए जब मैंने कहा कि तुम बदल गए हो, तो उसका मतलब सिर्फ इतना था कि मुझे उन छोटी-छोटी बातों की कमी महसूस होने लगी, जिनमें कभी तुम्हारा प्यार दिखाई देता था. क्योंकि प्रेम में इंसान बड़े पलों से कम और छोटी-छोटी बातों से ज़्यादा खुश होता है. राघव की आँखों से एक आँसू निकलकर गाल पर आ गया. उसे महसूस हुआ कि सचमुच उसे कितनी खूबसूरत साथी मिली है. एक ऐसी लड़की, जो शिकायत करते हुए भी उसकी परेशानियों को समझ रही थी, जो उसे दोष नहीं दे रही थी, बल्कि उसके और अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रही थी…कुछ क्षण बाद उसने भर्राई हुई आवाज़ में कहा
.म़ाफ कर दो, रिद्धिमा… मैं सच में नहीं समझ पाया कि मेरी छोटी-सी लापरवाही तुम्हें इतना खालीपन महसूस करा रही है…मैं प्यार करना नहीं भूला था… बस प्यार जताना थोड़ा भूल गया था..
उधर रिद्धिमा मुस्कुरा दी..पगले… प्यार जताना ही तो सबसे ज़रूरी होता है..
राघव भी मुस्कुरा पड़ा.
फिर उसने कहा-एक वादा करूँ?…
हम्म….अब से तुम्हारा खाना खाया? भी मैं बनूँगा… तुम्हारा सो जाना, ज़्यादा देर मत जागना भी मैं बनूँगा… और तुम्हारे हर बुरे दिन में वह एक आवाज़ भी, जो कहेगी…मैं तुम्हारे साथ हूँ..रिद्धिमा की आँखें भी भर आईं.
.और अगर फिर कभी मुझे लगे कि तुम बदल गए हो?. उसने शरारत से पूछा.
राघव हँस पड़ा..तो मुझे डाँट देना… लेकिन अपने दिल से दूर मत करना..
क्यों?. क्योंकि मुझे अब समझ आ गया है कि दूरियाँ रिश्तों को नहीं तोड़तीं… छोटी-छोटी बातों की कमी तोड़ देती है..फोन के उस पार रिद्धिमा चुप थी.
क्या हुआ? राघव ने पूछा-कुछ नहीं….
फिर चुप क्यों हो? रिद्धिमा मुस्कुराई और धीरे से बोली-आई लव यू
बस… आज फिर तुम पहले वाले राघव लग रहे हो..और उस समय कई किलोमीटर की दूरी के बावजूद, दो दिल पहले से कहीं ज़्यादा करीब आ गए थे.

3 thoughts on “अधूरी परवाह

  1. रिश्तों में छोटी छोटी बातें कितनी मायने रखती है इसे ही खूबसूरती से समझाती हुई सुंदर कहानी👌

  2. बहुत सुन्दर कहानी!
    हाँ कहना भी पड़ता है
    प्यार है तो जताना भी पड़ता है!

  3. ख़ूबसूरत अहसास को सुंदर ढंग से पिरोया है आपने बेहतरीन कहानी 👌💐

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