gulmohar
devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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राही राज़ को साहित्य सम्मान और प्रीति राही को संगीत सम्मान

श्री सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद का वार्षिक उत्सव बिहार भवन, बैंगलोर में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। राही राज़ को साहित्य सम्मान और प्रीति राही को संगीत सम्मान प्राप्त हुआ।

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इंदौरियत जिंदा है…..

इंदौर ने स्वच्छता में लगातार आठवीं बार पहला स्थान पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि जब नागरिक जागरूक हो जाएं तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। जहां देश के कई शहरों में सफाईकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं इंदौर में उन्हें हार पहनाकर सम्मानित किया जा रहा है। यह सिर्फ स्वच्छता की जीत नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की जीत है। इंदौर ने साबित किया है कि शहर की खूबसूरती केवल सड़कें नहीं, बल्कि वहां के लोगों का दिल भी होता है।

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इंदौर कंपोस्ट सिस्टम: खेतों से लंदन तक की गूंज

“जिन अंग्रेजों के ज्ञान को हम श्रेष्ठ मानते हैं, उन्हें जैविक खाद का ज्ञान बिहार और इंदौर के अनपढ़ किसानों ने दिया था। यही कारण है कि ‘इंदौर कंपोस्ट सिस्टम’ को वैश्विक पहचान मिली और गांधीजी स्वयं इसे समझने इंदौर आए। 1925 में अल्बर्ट हॉवर्ड ने इंदौर में कंपोस्ट खाद पर शोध कर पूरी दुनिया को प्राकृतिक खेती का संदेश दिया। सौ साल पहले भारतीय किसान पेड़ों की पत्तियों, गोबर और प्राकृतिक अवशेषों से जो खाद बनाते थे, वही आज भी मिट्टी की सेहत के लिए सबसे उपयोगी है। इंदौर नगर निगम ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने वार्डों में कंपोस्ट खाद प्लांट लगाकर आधुनिक नगरीय कृषि में नया अध्याय जोड़ा है।”

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वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को मिला विद्यावाचस्पति सम्मान

हरिद्वार में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में झारखंड की साहित्य साधिका को सम्मानित किया गया हरिद्वार, 12 जुलाई 2025 — साहित्यिक जगत के लिए यह गर्व का क्षण रहा जब झारखंड की वरिष्ठ कवयित्री निवेदिता श्रीवास्तव ‘गार्गी’ को विद्यावाचस्पति सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें हरिद्वार में आयोजित एक भव्य कवि सम्मेलन के…

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शताब्दी समारोह की ऐतिहासिक गूंज

भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से मध्य रेल ने ‘स्टेशन महोत्सव’ के तहत मुंबई मंडल के 6 हेरिटेज स्टेशनों पर शताब्दी समारोह का आयोजन किया। रेलवे बोर्ड की सलाह पर आयोजित इस विशेष समारोह ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी), रे रोड, आसनगांव, वासिंद, कसारा और इगतपुरी स्टेशनों को इतिहास, संस्कृति, तकनीक और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया।

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बंगलौर में मिथिला महोत्सव:

“बंगलौर की धरती पर मिथिला समाज ने पहली बार संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराया। पान, माछ, मखान के स्वाद और धरती से जुड़ने की परंपरा ने यह साबित कर दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही पहचान बचती है।”

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रविवार, 13 जुलाई को मध्य रेल पर मेगा ब्लॉक
– कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें प्रभावित

13 जुलाई, रविवार को मध्य रेल के मुंबई मंडल में विद्याविहार–ठाणे और कुर्ला–वाशी के बीच मेगा ब्लॉक लागू रहेगा। इस दौरान कई मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें डायवर्ट की जाएंगी और हार्बर लाइन की उपनगरीय सेवाएं रद्द रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और विशेष लोकल ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

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गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान का दीप जला, रिश्तों की लौ दमक उठी”

विद्यालय में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम संगम बन गया। संस्कृत नाट्य प्रस्तुति, गीता श्लोकों का पाठ, ध्यान सत्र और गुरु पूजन जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। मुख्य अतिथि एसडीएम श्री बृजेश सक्सेना एवं हार्टफुलनेस टीम की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों को सम्मानित कर गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया।

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शशिकला पटेल को पीएच.डी. की उपाधि

मुंबई विश्वविद्यालय द्वारा शशिकला पटेल को समावेशी शिक्षा पर किए गए उत्कृष्ट शोध के लिए डॉक्टरेट (पीएच.डी.) की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने यह शोध गोखले कॉलेज ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च, परेल में प्रो. (डॉ.) प्रशांत काले के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। इस अवसर पर कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने उनके शोधकार्य में सहयोग और प्रेरणा प्रदान की।

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