यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग, हॉफ टिकट और टिकट कलेक्शन के अनुभवों को यादगार अंदाज में पेश करता है। यात्रा और रेलवे से जुड़ी यादें, nostalgically बयान की गई हैं।

हॉफ टिकट : यादों का स़फर

यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग और हॉफ टिकट के अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। कैसे कार्डबोर्ड टिकट, तेज आवाज़ वाली मशीन और टिकट कलेक्शन का खेल यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की यादों में आज भी खास जगह रखता है, इसे विस्तार से बताया गया है।

Read More

सच्चा साथी, सच्चा प्रेम

यह भावपूर्ण हिंदी कविता प्रेम, स्नेह और जीवनसाथी के साथ जुड़े भावनात्मक अनुभव को उजागर करती है। इसमें प्यार की गहराई, भरोसा और साथी के साथ जीवन भर निभाए गए रिश्ते की मिठास को सरल और असरदार भाषा में व्यक्त किया गया है।

Read More

नारी देह, प्रकृति और समाज की दोहरी नैतिकता

यह सशक्त वैचारिक निबंध नारी, देह और समाज की दोहरी मानसिकता पर तीखा प्रश्न उठाता है। गाँव और शहर की स्त्रियों के दृष्टिकोण, सेक्स को लेकर समाज की संकीर्णता और प्रकृति के सहज संतुलन को केंद्र में रखते हुए लेख स्त्री-विमर्श को एक गहरे दार्शनिक स्तर पर ले जाता है।

Read More
भागती जिंदगी और खालीपन को दर्शाता प्रतीकात्मक दृश्य, जिसमें समय की कमी, धन की दौड़ और सुकून से दूर होता आधुनिक मनुष्य दिखाई देता है

खाली हाथ जाना है…

यह कविता आधुनिक जीवन की भागदौड़, दौलत की अंधी दौड़ और सुकून से दूर होते इंसान की विडंबना को उजागर करती है। “मेरी-मेरी” में उलझे मनुष्य की मानसिकता और खोते मानवीय संबंधों पर यह एक गहरी, आत्ममंथन कराती हुई टिप्पणी है।

Read More
कविता और किताब को प्रेम के प्रतीक के रूप में दर्शाता भावनात्मक दृश्य, जिसमें शब्दों के माध्यम से स्नेह और आत्मीयता का एहसास झलकता है

उपहार में शब्द

यह कविता उपहारों से परे शब्दों के स्नेह को महत्व देती है, जहाँ प्रेम फूलों या वस्तुओं में नहीं, बल्कि लिखी और पढ़ी गई कविताओं तथा किताबों के भावनात्मक स्पर्श में बसता है।

Read More
मुलुंड पश्चिम के प्लेयस मैराथन मैक्सिमा सभागार में आयोजित पोइसी टेल्स समूह की वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में मंच पर काव्य पाठ करते रचनाकार और श्रोताओं से भरा सभागार

शब्दों का उत्सव बना पोइसी टेल्स की बहुभाषी काव्य गोष्ठी

पोइसी टेल्स समूह द्वारा ११ जनवरी २०२६ को मुंबई के मुलुंड पश्चिम में आयोजित वार्षिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी में देशभर से आए रचनाकारों ने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नन्ही कवयित्री राम्या तिवारी की भावपूर्ण प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

Read More
एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

Read More
बेटे का इंतजार करती मां की भावुक और प्यार भरी यादें –

बाई, आज तू होती तो…

बाई की वह मुद्रा कभी अचानक नहीं होती थी. पूरा महीना इंतज़ार करने के बाद, जब मैं पुणे से अपने घर लौटता, तो माँ हमारे पहले मकान के पहले कमरे में खिड़की खोलकर बैठी होती थी. कहने को तो वह दूध लेने वाले का इंतज़ार कर रही होती थी, पर असल में उसे मेरा ही इंतज़ार होता था. जैसे ही मैं दरवाज़े से भीतर कदम रखता, वह हल्की-सी मुस्कान के साथ एक ही नज़र में मेरा पूरा एक्स-रे कर लेती.. दुबला तो नहीं हुआ, काला तो नहीं हो गयाए बाल और स़फेद हुए या डाई नहीं की. कुछ भी उससे छुपा नहीं रहता था.

Read More
मोबाइल की लत में डूबा समाज दर्शाती हिंदी कविता “मोबाइल की दुनिया”

मोबाइल की दुनिया

मोबाइल आज ज्ञान, संचार और सुविधा का माध्यम है, लेकिन अंधाधुंध उपयोग ने रिश्तों, बचपन और मूल्यों को संकट में डाल दिया है। चन्द्रवती दीक्षित की यह कविता तकनीक और विवेक के बीच
संतुलन की ज़रूरत को गहराई से उजागर करती है।

Read More
विद्योत्तमा साहित्य सुधाकर सम्मान 2026 से सम्मानित होने वाले ग़ज़लकार डॉ. प्रमोद कुमार कुश तन्हा

डॉ. प्रमोद कुमार कुश को विद्योत्तमा साहित्य सुधाकर सम्मान

सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. प्रमोद कुमार कुश ‘तन्हा’ को उनके ग़ज़ल-संग्रह ‘लकीरों का सफ़र’ के लिए 2026 का विद्योत्तमा साहित्य सुधाकर सम्मान नासिक में भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा।

Read More