तुम “तारा” हो
तुम मेरे आकाशगंगा का तारा हो—जो मेरे ख्वाहिशों के लिए टूटने को तैयार रहती हो, अपनी खुशियों, समय और संसाधनों को बटोरकर भी प्रकाश फैलाती रहती हो। तुम मुझे सपने सच करने का साहस देती हो और सिखाती हो कि दूसरों के लिए भी तारा बनना संभव है।

तुम मेरे आकाशगंगा का तारा हो—जो मेरे ख्वाहिशों के लिए टूटने को तैयार रहती हो, अपनी खुशियों, समय और संसाधनों को बटोरकर भी प्रकाश फैलाती रहती हो। तुम मुझे सपने सच करने का साहस देती हो और सिखाती हो कि दूसरों के लिए भी तारा बनना संभव है।
उस शाम का मौन बहुत कुछ कह गया। आपके कहने का इंतज़ार नहीं था मुझे, क्योंकि आपकी नज़रें और आपकी ख़ामोशी ही मेरे दिल तक उतर आई थीं। वह अहसास किसी अनदेखी धारा की तरह मेरे हृदय को छूता चला गया। आसमान पर टिमटिमाते तारे हमारे साक्षी बने और हरसिंगार की महक ने आपके मन की अनकही बात मुझ तक पहुँचा दी। हम आमने-सामने थे, और ऐसा लगा जैसे हमारे दिलों के द्वार सदियों से एक-दूसरे की प्रतीक्षा कर रहे हों। दूर तक फैली चाँदनी ने हमें घेर लिया और हरसिंगार की माला ने हमारी आत्माओं को एक सूत्र में बाँध दिया। उस पल न समय का कोई बंधन था, न दूरी की कोई दीवार—बस आप थे, मैं थी और हमारा गहरा, मौन प्रेम।
त्योहार और व्रत जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन समय के साथ उन्हें निभाने की शक्ति और परिस्थिति भी बदलती है। सेनु हर साल पूरे उत्साह से व्रत करती है, पर पति की चिड़चिड़ाहट उसे खटकती है। सब्ज़ी मंडी की भीड़, पूजा की लंबी सूची और वर्षों की थकान के बीच पति का यह कहना कि “भक्ति उतनी ही करो जितनी शक्ति हो” उसे भीतर तक छू जाता है। आखिरकार, त्यौहार का अर्थ ईश्वर को खुश करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और खुद को संतुलन में रखना भी है।
जब से मैंने हिंदी लेखन शुरू किया है, कई हिंदी के धुरंधरों की तीखी नज़रों से नज़र बचाते हुए घूम रहा हूँ। उन्हें ऐसा लगने लगा है कि मैंने उनका एकाधिकार छीन लिया है। मैं, जो अंग्रेज़ी दवा का डॉक्टर होकर सारी ज़िंदगी फिरंगी भाषा की चाकरी में लगा रहा, अब अचानक हिंदी भाषा में लिखने का क्या चस्का लग गया?
फेसबुक पर मेरे एक पुरातात्विक-कालीन हिंदी के गुरुजी जुड़े हुए हैं, जो मेरे हर एक लेख को बारीकी से देखते हैं। मुझे लगता है कि मेग्निफाइंग ग्लास का प्रयोग करते होंगे। ऐसा नहीं लगता कि मोबाइल में फॉण्ट को उँगलियों से ज़ूम करना भी उन्हें आता होगा! हमें ऐसा लगता है जैसे हम वापस स्कूल में आ गए हैं।
हिंदी स्वयं को एक दिन की रानी और भाषाओं की नानी कहती है। उसकी बहन उर्दू है, जिसके साथ उसे सदा बने रहना है। हिंदी चाहती है कि वह फूले-फले और खूब आगे बढ़े। वह आग्रह करती है कि लोग उसे सिर्फ उसके दिवस पर ही नहीं, बल्कि हर दिन याद करें, पढ़ें और लिखें।
हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि देश का सम्मान और अभिमान है। इसमें प्रेम बसता है, स्वरों की मधुर तान गूंजती है और हर शब्द अपनी सरस लय से हृदय को छू लेता है। यह हमारी सभ्यता और सरल आचरण की पहचान है, जो चरित्र को निखारती और राष्ट्र की शान को बढ़ाती है। हिंदी के बिना ज्ञान अधूरा है, इसलिए इसे सदा सर्वोपरि रखना ही हमारा कर्तव्य है।
बिहार के बेतिया में एक साल के मासूम ने खेल-खेल में कोबरा को काट डाला। सांप की मौत हो गई, लेकिन बच्चा सुरक्षित है और इलाज के बाद खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
कभी सिर्फ व्रत के खाने तक सीमित मखाना आज हेल्थ-फ्रीक लोगों की थाली में जगह बना चुका है। लो-कैलोरी और हाई-फाइबर स्नैक होने के कारण इसे सुपरफूड कहा जा रहा है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, मखाना वजन घटाने, शुगर कंट्रोल और हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद है।
त्योहारों के मौसम में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मध्य रेल ने बड़ी घोषणा की है। इस बार पूजा, दिवाली और छठ पर्व के लिए कुल 1126 विशेष ट्रेनें चलाई जाएँगी। इनमें से 182 नई विशेष ट्रेनें अभी घोषित की गई हैं, जबकि 944 ट्रेनें पहले ही घोषित हो चुकी हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि नई ट्रेनों से मुंबई, पुणे और अन्य शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना जाने वाले यात्रियों को सीधी सुविधा मिलेगी।
सुरेश परिहार, लाइव वायर न्यूज, पुणे सोशल मीडिया पर एक नया क्रेज़ छा गया है, जिसे लोग नैनो बनाना के नाम से जानते हैं. इस ट्रेंड में तस्वीरों को कुछ ही सेकंड में 3D डिजिटल फिगर में बदल दिया जाता है. गूगल के नवीनतम टूल, 2.5, की मदद से लोग अपनी, अपने दोस्तों, पालतू जानवरों…