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वलसाड और वेलांकन्नि के बीच चलाएगी विशेष ट्रेन

पश्चिम रेलवे यात्रियों की सुविधा तथा अतिरिक्त भीड़ को समायोजित करने के उद्देश्य से वलसाड और वेलांकन्नि स्टेशनों के बीच विशेष किराये पर एक विशेष ट्रेन चलाएगी.पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस ट्रेन का विवरण इस प्रकार है.

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समाज में फिल्म माध्यम का महत्व सर्वाधिक

समाज के अंतिम छोर तक किसी भी विषय को पहुंचाने का कार्य फिल्म माध्यम के जरिए प्रभावी ढंग से होता है, इसलिए इस माध्यम का महत्व सर्वाधिक है, ऐसा मत प्रसिद्ध अभिनेत्री रेणुका दफ्तरदार ने व्यक्त किया. पी. एम. शाह फाउंडेशन और वर्धमान प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित 14वें स्वास्थ्य फिल्म महोत्सव का समापन रेणुका दफ्तरदार की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ

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जब सवाल कपड़ों का नहीं, मानसिकता का हो

भारत में बलात्कार की घटनाएँ हर उम्र और वर्ग को प्रभावित कर रही हैं छोटी बच्चियाँ, किशोर, महिलाएँ और यहाँ तक कि पुरुष भी शिकार बन रहे हैं। यह केवल शरीर का नहीं, मानसिकता का अपराध है। समाधान क़ानून के साथ-साथ शिक्षा, संवेदनशीलता और समाजिक चेतना में निहित है।

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साइकिल, सपने और मिल रोड

नौवीं कक्षा में प्रवेश से पहले साइकिल सीखने का सपना हर छोटे शहर के बच्चे की तरह लेखक के मन में भी पलता रहा। पैसों की कमी, उधारी की सीमाएँ और जुगाड़ के सहारे मिली एक खटारा साइकिल गिरते-पड़ते सीखने की कोशिश और अंत में हुई “क्रैश लैंडिंग” इस कहानी को मासूम बचपन की यादों से भर देती है।

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टूटे शीशों के बीच खिलता लालबाग

स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान दक्षिण भारत की 21 दिनों की यात्रा लेखक के लिए केवल भ्रमण नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और मानवीय व्यवहार को समझने का गहन अनुभव बनी। बंगलौर में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक अनजान व्यक्ति की निस्वार्थ मदद और लालबाग की शांति इस यात्रा को जीवनभर स्मरणीय बना गई।

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कोई लौटा दे मेरे… वो स्कूल के दिन!

पैदल स्कूल जाना, बिना ट्यूशन के पढ़ाई, सादगी भरा जीवन और माता-पिता की निश्चिंतता। सुविधाओं की कमी के बावजूद उस दौर में संतोष, आत्मनिर्भरता और खुशियों की भरपूर अनुभूति थी, जो आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में दुर्लभ हो गई है।

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मीरा के नाम ख़त

मीरा के जीवन और भक्ति को याद करते हुए लेखिका अपने भीतर उठते असंख्य प्रश्नों से जूझती है। बिना देखे कृष्ण पर किया गया अटूट विश्वास, सांसारिक सुखों का त्याग और विषम परिस्थितियों में भी स्वयं को अक्षुण्ण रखना मीरा की भक्ति आज भी मन को विस्मित और प्रेरित करती है।

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जीत

हार को स्वीकार करने का साहस ही सच्ची जीत की शुरुआत होता है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम और आत्मविश्वास बनाए रखता है, वही आगे चलकर मंज़िल तक पहुँचता है। रास्ते आज कठिन लग सकते हैं, पर यदि हौसलों से भरी कोशिश जारी रहे तो कल वही रास्ते सफलता की ओर ले जाते हैं। गिरना जीवन का स्वभाव है, पर हर बार गिरकर उठना और फिर आगे बढ़ना ही संघर्ष की असली पहचान है।

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पुणे में ‘कलांगन वाटिका’ का आयोजन

भारतीय शास्त्रीय संगीत और कला को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पुणे स्थित प्रतीक राजकुमार के संगठन ‘साउंड्स ऑफ बीट्स’ द्वारा ‘कलांगन वाटिका’ नामक एक अनोखी सांस्कृतिक पहल का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत दो दिवसीय कार्यक्रम शुक्रवार, 19 दिसंबर और शनिवार, 20 दिसंबर को आयोजित होंगे।

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वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

बचपन की यादें हमेशा खास रहती हैं। रविवार की सुबह, बारिश में कागज़ की कश्ती तैराना, दोस्तों के घर जाकर टीवी देखने की खुशी ये छोटे-छोटे पल हमारी दुनिया को पूरी तरह जीवंत बना देते थे। अब काम, ऑफिस और जिम्मेदारियों के बीच वही मासूमियत खो गई है, पर अंदर वही छोटा बच्चा अभी भी जिंदा है, बारिश में कागज़ की कश्ती बहा रहा है, और हर याद उसे मुस्कुराकर बुला रही है।

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