
डॉ. संगीता पांडेय
सिंह सवार, मैया रानी, जग की पालनहारी,
तीन लोक में गूँज रही है महिमा तुम्हारी।
असुरों का संहार करने, रण में तुम हो आती,
भक्तों के हर संकट को पल में दूर भगाती।
लाल चुनरिया, पाँव महावर, चमक रहा ललाट,
देख रूप कल्याणी तेरा, काँप उठे खलाट।
हाथों में त्रिशूल विराजे, चक्र और खड्गधारी,
दुष्टों का अभिमान मिटाए, शक्ति हो तुम न्यारी।
दुर्गा सप्तशती के स्वर में गूँजे नाम तुम्हारा,
डूबती हुई नैया का तू ही एकमात्र सहारा।
शेरावाली, अंबा, जगदंबे, नाम अनेक तुम्हारे,
चरणों में झुकते आकर सुर, मुनि और सारे।
माँ की ज्योति से अलौकिक, जगमग होता धाम,
धन्य हुआ वह प्राणी जिसने लिया तुम्हारा नाम।
शरणागत की रक्षा करना, हे जग की महारानी,
कोटि-कोटि वंदन तुझको, गाऊँ महिमा बानी।
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आदि शक्ति जगदंबे भवानी
प्रेम मिलन

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