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अधूरी चाय, अधूरा इश्क़

गांव के आंगन में एक लड़की चाय का कप पकड़े, सामने भावुक खड़ा एक युवक, हल्की धूप और भावनात्मक माहौल

शिल्पा सिन्हा, प्रसिद्ध लेखिका एवं वीएफएक्स इंजीनियर कोल्हापुर, महाराष्ट्र

मोहित, एकदम सुलझा हुआ लड़का, ऊँचा कद, सांवला सा था और चेहरे पर गजब की रौनक थी उसके. स्कूल में पढ़ाता था.
बहुत खुश था आज वह..

प्रिसिंपल ने उसे नजदीकी गांव में जाके शिक्षा का महत्व समझाने के लिए उसे चुना था. पूरा एक महीना वहीं रहके ये काम उसे करना था.
दूसरे ही दिन वो गाँव पहुंच गया. दोपहर हो गयी थी. समान रूम में रखके वो लोगोंसे मिलने पैदल ही निकला. कुछ औरतें बाहर बैठी थी उनसे मोहित ने गांव के बारे में पूछना चाहा.
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सब बोली साहब जरा रुक जाइये, शरू अभी आती ही होगी, पूरी गांव की खबर रखती है वो…
शरू?? मोहीत ने पूछा
शर्वरी नाम है, सब बता देगी वो आपको.. एक ने कहा… वहीं पे खेलते हुए बच्चों को उसने शरू को बुलाने के लिए भेज भी दिया.
तबतक मोहित वहीं बैठा रहा.
अचानक उसे पायल की आवाज़ आयी, दौड़ते हुए एक लड़की वहाँ आयी. बड़ी बड़ी आंखे, लंबे बाल और नजर न हटे ऐसा चेहरा. मोहित उसे देखता ही रह गया.
चाय लो साहब, आपके लिए अभी बनाके लायी हूँ,
पिंटू ने कहा के कोई साहब आये है शहर से और मां हमेशा कहती है कि मेहमान को चाय जरूर पिलानी चाहिए, तो मैं ले आयी
नही मैं चाय नहीं पीता.
मोहित ने बेझिझक बोल दिया…
चाय को ना नहीं बोलते साहब, पाप लगता है शरू ने खिलखिलाक़े हंसते हुए कहा.
मोहित जिसने सालों से चाय नही पी थी आज सोचा कि एक घूंट पी ही लेते है नही तो बुरा लग जायेगा इन सबको.. ऐसे सोचते हुए उसने चाय की एक घूंट ली और वो चाय की खुशबू … स्वाद उसे पूरी चाय पीने के लिए मजबूर कर गयी..
अब तो ये रोजका हो गया था, रोज शरू मोहित के लिए चाय बनाके लाती थी.
एक महीना बीतने को था, दो दिन बाद मोहित को लौटना था… दोनों के बीच कुछ था नहीं पर फिर भी मोहित काफी परेशान था, कुछ था जो उसे जाने नहीं दे रहा था, अंदर अंदर कुछ टूट रहा था, वो भी ये समझ रहा था…
शरू की बातें, उसका भोलापन, उसका सबके काम आना, बच्चों के साथ मस्ती करते हुए खेलना…सब उसके आंखों के सामने कोई ़िफल्म की तरह आ रहा था .. तभी शरू आयी दरवाजे पर
साहब, आप जा रहे हो परसों? बड़ा सुना लगेगा ये मेरा गांव आपके जाने के बाद.. वो हलकी सी मुस्कान लिए बोली पर उसकी भरी हुई आंखे मोहित से छुप न सकी.
देखिए मैं क्या लायी हूं आपके लिए… कहते हुए उसने एक शो केस में रखने के लिए पिल्लूसी चाय की कप मोहित को दी ..और वो चली गयी..मोहित बस देखता रह गया उसे जाते हुए..
मोहित वापस आके अपने काम में लग गया , और ऐसे ही काफी साल बीत गए …ना वो कभी शरू के गांव गया ना ही कभी उसने उसके बारे में कुछ पता किया…. उसने चाय पीना छोड़ दिया था लेकिन जब भी कभी वो चाय देखता था शरू की याद उसे आये बिना रहती नही थी.
कुछ दस बारह साल यूँ ही गुजर गए, मोहित ने शादी भी कर ली थी …वो और मोहिनी खुश भी थे पर वो अनकही इश्क़ की कहानी उसे कई बार नींद से जगा देती थी..
ऐसे ही स्कूल के कोई काम से उसे फिर शरू के गांव जाना था .. पूरे रास्ते वो गांव में बिताए दिनों की यादों में खोया रहा, जैसे ही गांव पहुंच गया शरू की याद ने उसे बेचैन कर दिया पर पूछता भी किससे वो ..सब बदला बदला सा लग रहा था उसे..
अपनी ही धुन में वो एक घर के बाहर पेड़ के नीचे बैठ गया, पुरानी यादों ने जैसे उसे थका दिया हो…तभी पायल की मीठी सी आवाज़ ने उसे चौका दिया..
उसने नजर उठा के देखा तो एक नन्ही सी बच्ची चाय लेके उसके सामने खड़ी थी…
वो ही पहचानी सी चाय की खुशबू, मोहित के रौंगटे खड़े हो गए, उसकी आंखें मोहित को पहचानी सी लगी…मोहित ने उसके हाथ से चाय लेके बाजू रख दी और कहा के हम चाय नही पीते गुड़िया…
पी लो ना, चाय नहीं पी तो पाप लगता है…हलकी सी मुस्कान लिए वो बोली….
मोहित का हाथ पकड़ के वो उसे घर के अंदर ले गयी…
खाट पे उसके बाबा सोये पड़े थे …
बाबा बीमार है, मैं सिर्फ चाय ही बना सकती हूं..उसने सफाई दी…
मोहित कुछ और पूछे तभी उसे शरू की ़फोटो दिखी….. वो ही मीठी सी मुस्कान वाली..पर ..हार चढ़ाया हुआ था उसपे…
मोहित ने गुड़िया के बाबा के इलाज का इंतजाम तो कर दिया पर उन्हें बचा न पाया वो..
तीन दिन बाद मोहित घर आनेवाला था…. मोहिनी खुश थी…
बेल बजी …मोहिनी ने दरवाजा खोला… नन्ही सी गुड़िया को वो देखते ही रह गयी..मोहित आगे आके बोला कि आज से ये अपने साथ ही रहेगी…मोहिनी ने खुशी गुड़िया को गले लगा लिया … मोहित सोच रहा था …. इसीलिए शायद भगवान ने मुझे बेऔलाद रखा होगा…
मोहिनी, जरा चाय बना दो तो
भरी हुई आवाज़ में मोहित ने कहा…

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