
सुरेश परिहार (संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे) की रिपोर्ट
शिवाजीनगर।
मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही शहर में पानी की कमी की समस्या गंभीर होती जा रही है। तापमान बढ़ने और जलस्रोतों पर बढ़ते दबाव के कारण कई क्षेत्रों में नियमित पानी आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके चलते नगर निगम को टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना पड़ रहा है। शहर में टैंकरों की मांग तेजी से बढ़ रही है और मार्च के शुरुआती दिनों में ही लगभग पांच हजार अतिरिक्त टैंकरों की आवश्यकता सामने आने लगी है।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में 42,542 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की गई थी। फरवरी में यह संख्या बढ़कर 46,068 टैंकरों तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष फरवरी 2025 की तुलना में लगभग 6,580 अधिक है। यानी केवल एक महीने में ही टैंकरों की मांग में 3,500 से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा पानी की समस्या शहर के उपनगरों और हाल ही में नगर निगम सीमा में शामिल किए गए 23 गांवों में देखी जा रही है। इन क्षेत्रों में नियमित नलजल आपूर्ति सीमित होने के कारण नागरिकों को बड़ी मात्रा में टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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नगर निगम नागरिकों की जल आवश्यकता पूरी करने के लिए अपने टैंकरों के साथ-साथ निजी टैंकरों की भी सहायता ले रहा है। वडगांवशेरी, रामटेकड़ी, सासवड़ फाटा, धायरी, पटवर्धन बाग, पर्वती, पद्मावती और चतु:श्रृंगी जैसे क्षेत्रों में नगर निगम के आठ टैंकर भराव केंद्र बनाए गए हैं, जहां से टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जाती है।
नगर निगम हर वर्ष टैंकरों के जरिए निःशुल्क पानी उपलब्ध कराने पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च करता है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया के माध्यम से ठेकेदारों की नियुक्ति की जाती है और उन्हीं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाता है।
जल आपूर्ति विभाग के प्रमुख नंदकिशोर जगताप के अनुसार गर्मी की तीव्रता बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में टैंकर के पानी की मांग बढ़ रही है। नागरिकों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यकता के अनुसार टैंकरों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक कुल 4,59,077 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा चुकी है। इनमें से 3,86,307 टैंकर ठेकेदारों के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले वर्ष कुल 4,89,202 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की गई थी। हालांकि मार्च महीने के आंकड़े अभी इसमें शामिल नहीं हैं, इसलिए इस वर्ष यह संख्या पांच लाख से अधिक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
जल संकट के बीच बढ़ती टैंकर निर्भरता ने शहर के जल प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्थायी जल आपूर्ति व्यवस्था अभी भी पर्याप्त नहीं हो सकी है।
