एलपीजी संकट : रेस्टोरेंट मेन्यू से गायब हो रहे व्यंजन

Street food vendor cooking on stove with limited gas cylinder amid LPG crisis in India

गैस की कमी से होटल, कैंटीन और स्ट्रीट फूड विक्रेता मेन्यू सीमित करने को मजबूर

सुरेश परिहार, पुणे

भारत में व्यावसायिक एलपीजी (LPG) की कमी का असर अब सीधे लोगों की थाली और रेस्टोरेंट के मेन्यू पर दिखाई देने लगा है। देश के कई शहरों में होटल, हॉस्टल, कैंटीन और छोटे भोजनालय अपने मेन्यू से कुछ लोकप्रिय व्यंजन हटाने लगे हैं। कहीं नाश्ते के काउंटर से दोसों की संख्या कम हो रही है, तो कहीं चपाती की जगह चावल आधारित भोजन परोसा जा रहा है। कुछ जगहों पर तो चाय भी सीमित मात्रा में बनाई जा रही है।

बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में कई रेस्टोरेंट और फूड चेन ने संकेत दिया है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण उन्हें अपने मेन्यू में अस्थायी बदलाव करने पड़ रहे हैं। कई छोटे भोजनालयों और स्ट्रीट फूड दुकानों को गैस की अनुपलब्धता के कारण अस्थायी रूप से दुकानें बंद करनी पड़ी हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित स्ट्रीट फूड व्यवसाय

एलपीजी की बढ़ती कीमत और कमी का सबसे बड़ा असर स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर पड़ा है। कई विक्रेताओं को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके कारण वे मजबूरी में घरेलू सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि व्यावसायिक उपयोग के लिए यह अवैध माना जाता है। बढ़ती कीमतों और अचानक बढ़ी मांग के कारण छोटे व्यापारियों के लिए अपना व्यवसाय चलाना कठिन हो गया है।

वैश्विक तनाव से प्रभावित ऊर्जा आपूर्ति

एलपीजी की इस कमी का एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका असर सीधे ईंधन की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ा है।

भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है, जिसका बड़ा भाग मध्य पूर्व से आता है। यह आपूर्ति मुख्य रूप से हॉर्मुज जलडमरू मध्य से होकर गुजरती है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या अवरोध कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति को तुरंत प्रभावित कर सकता है।

सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता

स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वितरण प्रणाली पर भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। हालांकि व्यावसायिक एलपीजी पर निर्भर रेस्टोरेंट और फूड व्यवसायों के लिए स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

गैस की कमी में सबसे पहले मेन्यू से हटने वाले व्यंजन

रोटी, चपाती और पराठा

इन फ्लैटब्रेड को अलग-अलग तवे पर पकाना पड़ता है और अक्सर सीधे आंच पर फुलाया जाता है। बड़ी मात्रा में इन्हें बनाने में काफी गैस खर्च होती है, इसलिए कई कैंटीन और हॉस्टल ने चपाती देना अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

डोसा, उत्तपम और तवा आइटम

दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे डोसा और उत्तपम बनाने के लिए बड़े तवे को लगातार गर्म रखना पड़ता है। यह प्रक्रिया अधिक गैस खर्च करती है, इसलिए कई रेस्टोरेंट इन्हें मेन्यू से हटाने लगे हैं।

तले हुए व्यंजन

पूरी, भटूरा, पकौड़े और वडा जैसे तले हुए व्यंजन तेल को लंबे समय तक गर्म रखने की मांग करते हैं। गैस की कमी होने पर ऐसे व्यंजन सबसे पहले बंद किए जाते हैं।

धीमी आंच पर बनने वाली दालें

राजमा, छोले और चने जैसी दालें लंबे समय तक पकती हैं, इसलिए कई हॉस्टल और कैंटीन इन्हें अस्थायी रूप से मेन्यू से हटा रहे हैं।

चाय और कॉफी

कुछ स्थानों पर चाय और कॉफी भी सीमित मात्रा में बनाई जा रही है, क्योंकि पूरे दिन पानी उबालने में काफी गैस खर्च होती है।

बदलता रसोईघर: कम गैस में बनने वाले व्यंजन

गैस की कमी से निपटने के लिए कई रेस्टोरेंट और भोजनालय ऐसे व्यंजन बनाने लगे हैं जिन्हें कम समय और कम गैस में तैयार किया जा सके। इनमें प्रमुख हैं—

  • लेमन राइस या इमली राइस
  • उपमा और पोंगल
  • दाल-चावल
  • जल्दी पकने वाली सब्जियां

कुछ स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने कोयले या लकड़ी के चूल्हे का उपयोग भी शुरू कर दिया है ताकि उनका व्यवसाय जारी रह सके।

ईंधन संकट और भोजन व्यवस्था

एलपीजी संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की भोजन व्यवस्था वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से कितनी गहराई से जुड़ी हुई है। छोटे चाय स्टॉल से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक लगभग हर रसोई गैस पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तनाव और ऊर्जा संकट का असर सीधे आम लोगों के भोजन और रेस्टोरेंट के मेन्यू में दिखाई देता है।

जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक देश के कई रसोईघर कम गैस में बनने वाले सरल और जल्दी तैयार होने वाले भोजन पर ही निर्भर रहने के लिए मजबूर रह सकते हैं।

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