सनम, तुम देना साथ मेरा

भारतीय नवविवाहित स्त्री अपने जीवनसाथी के साथ पारंपरिक परिधान में प्रेम और विश्वास का भाव दर्शाते हुए

कृतिका कृति, प्रसिद्ध लेखिका, कानपुर

सनम, तुम देना साथ मेरा,
निभाना वादा हर जन्म।

मैं वसंत बनूँ,
मेरी बहार बन जाना तुम।
मैं चाँदनी बनूँ,
मेरे चाँद बन जाना तुम।

बनना मेरे जीवनसाथी,
जैसे सुंदर दीया-बाती।

साथ निभाना जब आवाज़ लगाऊँ,
संभालना जब ज़माने से डर जाऊँ।

जब क़दम लड़खड़ाएँ,
तुम्हारी बाँहें सहारा बन जाएँ।

बनकर मेरे पथप्रदर्शक,
मुझको राह दिखाना।

ओढ़ाकर चुनरिया लाज-शरम की,
माँग में सिंदूर सजाना तुम।

चूड़ी, बिंदी, लाली, काजल से
मुझको सजाना तुम।

नेह के धागों से बाँध लेना,
बुरी नज़र न लगने देना।

तुम्हारी हूँ,
मेरे बन जाना तुम।
जब रोऊँ तो
ख़ूब हँसाना तुम।

वादा किया है तो साथ निभाना तुम,
बीच राह कभी
छोड़कर न जाना तुम।

तुम्हारी हूँ,
तुम्हारी ही रहूँगी
हम दोनों के बीच
कभी तीसरे को
न लाना तुम।

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