शब्दों से सुकून

गुंजन, प्रसिद्ध लेखिका और मोटिवेशनल स्पीकर, पुणे

लिखो… कुछ तो लिखो।
जो दिल में आए, वही लिखो।
अच्छा या बुरा जीवन का अनुभव लिखो।
अल्फ़ाज़ों में अपने जज़्बात लिखो।

क्योंकि लिखने से सुकून मिलता है,
दर्द में राहत मिलती है,
ज़ख़्मों पर मरहम लगता है।

लिखो… अपने होने का एहसास लिखो।
क्योंकि लिखने से हौसलों को उड़ान मिलती है,
सपनों और गोल्स को पहचान मिलती है।

लिखो अपनी कहानी,
उसे बड़ी खूबसूरती से लिखो।
हर रंग को सहजता से लिखो,
हर मोड़ पर अपना सच लिखो।

क्योंकि तुम ही अपनी ज़िंदगी के रचनाकार हो,
तुम ही उसके Creator हो।

लिखो… क्योंकि लिखने से इतिहास बनता है,
और तुम इस इतिहास के रचयिता बन सकते हो।

लिखो इन सफ़ेद पन्नों पर,
रंगीन क़लम से लिखो।
एक खूबसूरत-सा ख़्वाब लिखो,
जो सिर्फ़ तुम्हारा हो
और तुम्हारी पहचान बन सके।

लिखो कुछ ऐसा लिखो
जो किसी का ख़्वाब हो,
तुम्हारे पास हो,
और तुम उसके लिए आभारी हो।

लिखो… क्योंकि लिखे बिना
यह कहानी अधूरी रह जाएगी,
और तुम्हारे जाने के बाद
फिर कभी दोहराई नहीं जाएगी।

2 thoughts on “शब्दों से सुकून

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