शब्दों से सुकून
लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा का संवाद है। लिखिए क्योंकि शब्द सुकून देते हैं, सपनों को पहचान देते हैं और आपको आपकी कहानी का रचनाकार बनाते हैं।

लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा का संवाद है। लिखिए क्योंकि शब्द सुकून देते हैं, सपनों को पहचान देते हैं और आपको आपकी कहानी का रचनाकार बनाते हैं।
उमड़ते भावों कोशब्दों में उकेरनान जाने यह शौक !कब और कैसे पनप गयानन्हा पौधा था जोअब वृक्ष बन गयाकुछ तो बचपन से ही थाप्रकृति का सान्निध्य मिलास्वयं ही हरा-भरा हो गयापानी के स्पर्श मात्र से हीखूब फल-फूल गयाउर्वरा के सान्निध्य मेंदोगुना हो गयामानों इच्छाओं कोखुला आकाश मिल गया। निरुपमा सिंह, प्रसिद्ध साहित्यकार, बिजनौर Post Views:…