रिजल्ट से पहले डर का कारोबार

राज्य ओपन स्कूल के छात्रों को बना रहे साइबर ठगी का शिकार

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज

उज्जैन– परीक्षा परिणाम से पहले की बेचैनी को हथियार बनाकर साइबर ठग अब मप्र राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को निशाना बना रहे हैं| ठग खुद को बोर्ड का अधिकारी बताकर पास कराने या अंक बढ़वाने का झांसा दे रहे हैं और इसके बदले ऑनलाइन पैसों की मांग कर रहे हैं|
जैसे-जैसे रिजल्ट की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे ऐसे फर्जी कॉल और मैसेज की संख्या बढ़ती जा रही है| कई मामलों में छात्रों की घबराहट और अभिभावकों की चिंता का फायदा उठाकर ठग मैसेज और यूपीआई सीधे जैसे माध्यमों से रकम ट्रांसफर कराने की कोशिश कर रहे हैं|
बोर्ड का साफ संदेश: नंबर या पास कराना नामुमकिन- मप्र राज्य ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह साइबर ठगी है| बोर्ड के अनुसार परीक्षा परिणाम केवल उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर आधारित होते हैं| रिजल्ट प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित है| किसी भी स्तर पर पैसे लेकर पास कराना या नंबर बढ़ाना असंभव है| बोर्ड ने यह भी बताया कि जिन नामों से ठग खुद को अधिकारी बता रहे हैं, ऐसे किसी व्यक्ति का बोर्ड से कोई संबंध नहीं है|
घबराहट ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार-शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिजल्ट के समय छात्र मानसिक दबाव में रहते हैं| इसी कमजोरी को साइबर ठग भुनाते हैं| आपका रिजल्ट अटक गया है, थोड़ी मदद से पास हो सकते हैं जैसे वाक्य छात्रों को डराने के लिए बोले जाते हैं, ताकि वे बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर दें|
सतर्क रहें, साझा न करें जानकारी
बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है किकिसी भी अनजान कॉल पर पैसे का लेन-देन न करें| रोल नंबर, जन्मतिथि या परीक्षा से जुड़ी कोई निजी जानकारी साझा न करें| बोर्ड के नाम पर आए किसी भी फोन कॉल की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि करें|यदि किसी छात्र या अभिभावक को ऐसा कॉल या मैसेज आता है, तो तुरंत बोर्ड को सूचित करें- हेल्पलाइन नंबर: 0755-2671066
साइबर सेल सक्रिय, नेटवर्क खंगालने की कार्रवाई
बोर्ड द्वारा दर्ज कराने के बाद साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है| ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया जा रहा है, ताकि पूरे गिरोह तक पहुंचा जा सके|
ठगी हो जाए तो देर न करें-यदि किसी ने गलती से पैसा ट्रांसफर कर दिया है, तो तुरंत कार्रवाई बेहद जरूरी है| साइबर अपराध में पहले दो घंटे को गोल्डन ऑवर माना जाता है| नेशनल साइबर हेल्पलाइन: 1930
अंत में-याद रखें
बोर्ड कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगता|
रिजल्ट आपकी मेहनत से तय होता है, किसी कॉल से नहीं|
शिक्षा के नाम पर हो रही इस ठगी को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है जागरूकता|

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