इंदौर में खुलकर बोले पत्रकार, राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर संस्था ‘मातरम’ की अनोखी पहल

इंदौर से वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की लाइव वॉयर न्यूज के लिए रिपोर्ट
इंदौर। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर इंदौर में एक अनोखा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पहली बार शहर के आम लोगों ने पत्रकारों से सीधे सवाल पूछे। सवाल पुछने वालों की जिज्ञासा थी कि क्या मैनेजमेंट का दबाव रहता है? क्या किसी पार्टी-नेता विशेष के पक्ष में खबरों को लेकर निर्देश रहते हैं? हर दिन के काम में अन्य अखबारों से कैसी प्रतिस्पर्धा रहती है? नेगेटिव खबरों के साथ पॉजिटिव खबरों के बीच तालमेल कैसे बैठाते हैं।
संस्था ‘मातरम’ द्वारा एमजी रोड स्थित बड़ीज् कैफे में आयोजित इस “लोकतंत्र के चौथे स्तंभ अभिनंदन समारोह” में इंदौर के नए और पुराने दोनों पीढ़ियों के पत्रकार एक ही मंच पर जुटे।
पत्रकारिता में दिन-रात जुटे रहने वाले पत्रकारों ने कहा भी कि कोई खबर नेगेटिव नहीं होती, नेगेटिव खबर में भी पॉजिटिव-सतर्क करने वाला संदेश रहता है। मैनेजमेंट का एक मात्र दबाव रहता है कि हर दिन अच्छा अखबार निकले, पाठकों की बात लिखने वाला, पाठकों की पसंद का अखबार निकालो।अखबार में विज्ञापन लाने, विज्ञापन आधारित खबरों का दबाव इसलिये नहीं रहता कि हर अखबार में इसके लिये मार्केटिंग टीम काम करती है।
कार्यक्रम के दौरान पहला सवाल इंदौर की जनता की ओर से महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने किया। उन्होंने पूछा कि “खबरें छोटी होती जा रही हैं, उनकी गहराई कम होती जा रही है—ऐसे में पत्रकारों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?” साथ ही टीआरपी की दौड़ में गलत खबरें प्रसारित होने के हालिया मामलों का भी जिक्र किया।
महापौर के सवाल का जवाब अमित मंडलोई ने दिया। मंच पर सवालों का जवाब देने वालों में वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र व्यास, अनिल कर्मा एवं प्रकाश हिंदुस्तानी भी मौजूद रहे।
इसके अलावा आम नागरिकों ने भी लगातार सवाल पूछे, जिनका जवाब प्रेस जगत से जुड़े अनुभवी पत्रकारों ने दिया।
इस कार्यक्रम में पत्रकारों का सम्मान तो किया ही गया और बदलते मीडिया परिदृश्य, चुनौतियों और जनता की उम्मीदों पर खुलकर चर्चा हुई।इस कार्यक्रम में दिल्ली से सईद अंसारी (आजतक) को भी शामिल होना था लेकिन अपरिहार्य कारणों से वे शामिल ना हो सके।
कार्यक्रम में शहर के कई नामचीन पत्रकार शामिल हुए, जिनमें राजेश जी चेलवात, हेमंत शर्मा, संजय लुणावत, हृदयेश दीक्षित, प्रतीक श्रीवास्तव, नवनीत शुक्ला, अरविंद तिवारी, सुनील जोशी सहित कई मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।कार्यक्रम का संचालन पत्रकार शेखर बागोरा ने किया। सवाल-जवाब के रोचक दौर के बाद दूसरे चरण में पत्रकारों का सम्मान महापौर पुष्यमित्र भार्गव और विधायक गोलू शुक्ला ने किया।
🔹समाज की चिंता करने वाले पत्रकारों के सम्मान का यह बेहतर दिन लगा-भावेश दवे
संस्था मातरम के अध्यक्ष भावेश दवे ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर इस सम्मान समारोह की कल्पना को लेकर कहा कि जब मैं समझने लायक हुआ तो पहले लगता था कि राजनीति में सक्रिय रहने वाले जनप्रतिनिधियों की लाइफ बड़ी चुनौतीपूर्ण होती है। कुछ समझ और बढ़ी तो लगा कि नेताओं से ज्यादा चौबीस घंटे दूसरों के लिये तो पत्रकार व्यस्त रहते हैं। दिन-रात खटने वाले पत्रकारों को मिलता क्या है, उनके काम की सराहना भी कौन करता है? यही सब सोच कर लगा कि आज के दिन जैसा अच्छा संयोग हो ही नहीं सकता पत्रकारों के कार्य के सम्मान का। इसमें मेरा कोई स्वार्थ भी नहीं है, मैंने उसी समाज के प्रतिनिधि के नाते यह पहल की है जिस समाज की बेहतरी के लिये पत्रकार बंधु अपने घर-परिवार की चिंता छोड़ कर भिड़े रहते हैं।
