हरियाणा का गौरव गान

अंजू शर्मा ‘वशिष्ठ’ करनाल, हरियाणा

हरियाणा है वीरों की धरती, शौर्य जहाँ की शान,
रक्त में बसा पराक्रम, माथे पर अभिमान।
मिट्टी यहाँ की महके वीरों के बलिदान से,
हर दिल में गूँजे स्वर भारत माँ के गान से।

पंडित लख्मीचंद की रागनी गूँजे, बनकर लोक कथाएं,
नेकीराम शर्मा की वाणी, सच्चा पाठ सिखाए ।
ऐसे वीरों की धरती ये, हरियाणा कहलाए,
शौर्य, त्याग और ज्ञान से, भारत का मान बढ़ाए।

लाला लाजपत राय की ज्वाला, जलती हर दिल में आज,
स्वाभिमान की दी जो शिक्षा, वो बन गई आवाज।
सर छोटू राम ने बोया बीज, किसान की खुशहाली का,
मेहनत को सम्मान मिला, हर खेत की लाली का।

हल चलाता किसान यहां, रण में जाता सिपाही,
मेहनत और हिम्मत की मिसाल हरियाणा की धरती सदाही
कुरुक्षेत्र की पावन रज से फूटा ज्ञान महान,
जय जवान, जय किसान की धरती है भारत का मान।

अब बेटियाँ भी बढ़ चलीं हैं, आसमान को छूने,
गीता-बबीता की हिम्मत से, फूल रहे हैं सीने।
खेती में नव विज्ञान सजे, हर खेत बने सोना,
मेहनत से माटी महके, हरियाणा का कोना-कोना।

शिक्षा, खेल, उद्योग में राज्य, आगे बढ़ता जाए।
हर दिल में है विकास का सपना, हर आँख में समाए।
भारत की शान हमारा राज्य, उज्ज्वल इसका नाम,
हरियाणा दिवस पर करते हम, नतमस्तक प्रणाम।

One thought on “हरियाणा का गौरव गान

  1. “जय हरियाणा, जय किसान! हमारी धरती, हमारी शान!”

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