साथ मेरा…..

मधु चौधरी, लेखिका, बोरीवली (मुंबई)

हर सांचे में ढलने का हुनर रखती हूं
कहर बरपा हो तो भी साथ निभाने का
हुनर रखती हूं
फेरों का हो या ना हो बंधन
वादे करके निभाने का
हुनर रखती हूं
तेरे दुख में , तू ना डूबे
यह भी हुनर रखती हूं
तेरे सुख में , तू ना बहके
यह भी हुनर रखती हूं
बस परखना ना तुम मेरी
वफादारी के जज्बे को,
साथ में होते हुए भी ,
साथ छोड़ने का
भी हुनर रखती हूं।

6 thoughts on “साथ मेरा…..

  1. इतने कम शब्दों में इतना कुछ कह देने का हुनर भी आप में ही है..!!
    अवर्णनीय …..!!

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