रूठे पिया

मधु चौधरी, लेखिका, बोरीवली, मुंबई

करवा चौथ बस आने ही वाला था, पर मेरे मन में उत्साह नहीं, बेचैनी थी। रवि और मेरे बीच झगड़े तो पहले भी हुए थे, पर इस बार कुछ अलग था . वह नाराज़ होकर चुप हो गए थे और उस चुप्पी ने हमारे बीच दीवार सी खड़ी कर दी थी।
करवा चौथ और पति की नाराज़गी …यह तो किसी भी पत्नी के लिए सबसे मुश्किल स्थिति होती है। साड़ी की जगह अब मन की सलवटें सीधी नहीं हो रही थीं। हर बात में कसक थी, हर पल में उम्मीद और डर का मिश्रण।

मुझे एहसास था कि गलती मेरी थी, पर न जाने क्यों, “पहले मैं क्यों बोलूं” वाली जिद दिल में बैठ गई थी। पर रिश्ते जिद से नहीं, प्रेम से चलते हैं। जब अपना कोई नाराज़ हो, तो उसे मनाना ही रिश्ते की सबसे खूबसूरत ज़िम्मेदारी होती है।

करवा चौथ से एक दिन पहले मैंने रवि की पसंद का खाना बनाया …कुरकुरी भिंडी और गाजर का हलवा। टिफिन में रखकर उसके बीच एक छोटा-सा “Sorry” कार्ड भी रख दिया। सोचा, जब वे ऑफिस में खोलेंगे, तो मुस्कुरा देंगे, और शायद एक फोन आएगा… “चलो, छोड़ो, भूल जाओ।” पर दिन ढल गया, फोन नहीं आया।

शाम ढलने लगी, और मेरे आँसू चुपचाप बहने लगे। तभी दरवाजे की घंटी बजी। मैं आँखें पोंछती हुई दरवाज़ा खोलने गई। सामने रवि थे … मुस्कराते हुए। उन्होंने कुछ कहा नहीं, बस मुझे अपनी बाहों में समेट लिया। वह एक पल जैसे सारे ग़ुस्से, सारे शिकवे पिघला गया।

“चलो, अब जल्दी से चाय बनाओ,” रवि बोले, “फिर हम मूवी देखने चलेंगे। वापसी में तुम्हें मेहंदी भी लगवा देंगे। डिनर बाहर से आर्डर कर लेंगे।”
मेरे आँसू अब मुस्कान बन गए। मैंने सिर उनके कंधे पर रख दिया। रवि ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा,
“देखो, जीवन में ऐसे छोटे-मोटे झगड़े तो होंगे। पर ये झगड़े अगर चुप्पी में बदल जाएँ, तो रिश्ते की मिठास खो जाती है। हमें हमेशा एक-दूसरे को मनाना चाहिए, क्योंकि मनाना ही प्रेम का सबसे सच्चा रूप है।
कभी-कभी मैं ऑफिस की उलझनों में तुम्हें वक्त नहीं दे पाता, पर इसका मतलब यह नहीं कि मैं तुमसे दूर हूँ। तुम्हारा साथ, तुम्हारी समझ ही तो मेरी ताकत है।” उस पल मुझे लगा — यही है करवा चौथ का असली अर्थ। यह केवल पति की लंबी उम्र का व्रत नहीं, बल्कि उस प्रेम, समर्पण और विश्वास का पर्व है जो दो आत्माओं को एक डोर में बाँधता है।

अगले दिन जब चाँद निकला, तो मैं व्रत के साथ रवि की आँखों में भी वही चमक देख रही थी , प्रेम की, अपनापन की। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर कहा-“आज मैं भी तुम्हारे साथ व्रत रख रहा हूँ हमारे रिश्ते की मजबूती और हमारी एक-दूसरे की सलामती के लिए।”

26 thoughts on “रूठे पिया

  1. रिश्ते की खूबसूरती इसीमे है खूबसूरत लघुकथा साधुवाद आपको

    1. एक निवेदन
      रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
      आपका साथी

      1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, इसी तरह आपका स्नेह बना रहे
        – सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

    1. एक निवेदन
      रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
      आपका साथी

    2. बहुत सुंदर कहानी है। इसमें पति-पत्नी के रिश्ते को बहुत ही प्यारे ढंग से प्रस्तुत किया है। यह रिश्ता कभी खट्टा कभी मीठा होता है और दोनों के सामंजस्य से ही निभाया जाता है। लेखिका जी को बहुत-बहुत बधाई।

      1. एक निवेदन
        रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
        आपका साथी

        1. First congratulations to Madhu
          Shabdo ko bahut hi khubsurat tarike se piroya hai
          Aage bhi isi tarah likhati rahena chhoti si khatti mitthi baato ke bad bhi rishta kaise majboot kiya jay iska khubsurat varnan
          Saho margadarshan
          Dhanyawad
          Anita

          1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, इसी तरह आपका स्नेह बना रहे
            – सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

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      रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
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        रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
        आपका साथी

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      रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
      आपका साथी

      1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, इसी तरह आपका स्नेह बना रहे
        – सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

  2. सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।
    आप सभी के शब्द प्रेरणा देते हैं आगे लेखन के लिए।

    1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, इसी तरह आपका स्नेह बना रहे
      – सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

  3. Kabhi ruthna kabhi manana kabhi pyar kabhi takrar..yehi h pati patni ke grihasth jeevan ka adhaar…..Bhut hi sunder lekh….

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