जीवन एक संघर्ष है…

बाबूलाल डीलवाल, सीनियर टीचर, जावली (राजस्थान)

मरण कब कठिन था…?
जीवन ही कठिन था, कठिन है
और कठिन रहेगा…!

जीने के लिए ही समस्त जद्दोजहद है।
जिजीविषा चाहिए, संघर्ष चाहिए जीने के लिए…!

माना कि आसान नहीं है जीना…!
बिना संघर्ष जीना कोई जीना नहीं…!
मर जाना है, जीते जी मर जाना…!

सनद रहे, केवल सांस लेना जीना नहीं…!
प्रकृति के साथ तादात्म्य स्थापित करना…!
प्रेम, सौंदर्य, रस, आनंद, विरह, मिलन…!
सब का समन्वय, यही जीवन है।

विदा नहीं लेना है…!
है फितरत संघर्ष की तो विदा कैसी…?
करने दो प्रकृति को अपना काम…!
करते जाओ अनवरत अपना काम…!

अपना काम के माने संघर्ष…!
पर्यावरण में तैरती बुराइयों से संघर्ष…!
अपने आप से, अपनी बुराइयों से संघर्ष…!

नहीं लेना विदा…! विदा हार है…!
मरण है विदा और संघर्ष ही जीवन।

हमारा अतीत है संघर्ष…!
वर्तमान है और भविष्य भी संघर्ष…!
हमारी जिजीविषा की कहानी है संघर्ष…!

जीत और हार से परे होता है संघर्ष…!
हो चाहे कष्टकारी अतीत…!
सुकून देता है संघर्ष का अतीत।

9 thoughts on “जीवन एक संघर्ष है…

  1. बेरोजगारी से तंग छात्र जब परीक्षा देकर परिणाम के इंतजार में व्याकुल रहते हैं खबर आती है पर्चा लीक हो गया… तैयार फसल पर बारिश ओले गिर जाय तो किसान की स्थिति क्या होती है उस संवेदना को महसूस करते हुए मेरे मन मस्तिष्क में इस रचना का आविर्भाव हुआ है…
    जीवन के संघर्ष और गिरकर फिर उठने के भाव को व्यक्त करती मेरी कविता आपके समक्ष प्रस्तुत है…

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