पत्रकारिता का तीर्थ रहा है प्रेस क्लब

रिपोर्टः कीर्ति राणा, वरिष्ठ पत्रकार (पूर्व सचिव, प्रेस क्लब, इंदौर)
देश में कभी अपनी विशिष्ठ पहचान रखने वाले इंदौर प्रेस क्लब के हर तीन वर्ष में होने वाले चुनाव करीब छह साल बाद हो रहे हैं । मतदान 14 सितंबर रविवार को होना है। क्लब के विधान मुताबिक कोई भी सदस्य प्रमुख पद के लिये दो बार चुनाव लड़ सकता है, वर्तमान अध्यक्ष अरविंद तिवारी की तरह पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं, इसलिये दोनों चुनावी रेस से बाहर हो गए हैं। महत्वपूर्ण यह कि पद पर रहे ये दोनों ही अध्यक्ष आरोपों के भी शिकार हुए हैं और बात कोर्ट तक भी पहुंची है।
इस बार प्रेस क्लब के चुनाव में पिछले चुनावों से हट कर माहौल है । मुख्य रूप से सरस्वती और अहिल्या पैनल ने सभी पदों के लिए और एक तीसरी पत्रकार एकता पैनल ने कुछ पदों के लिए प्रत्याशी खड़े किए हैं।इसके साथ ही बिना किसी पैनल के कुछ प्रमुख पदों के लिए स्वतंत्र प्रत्याशी भी मैदान में हैं इसलिये यह दावा किया जा सकता है कि किसी भी एक पैनल को पूर्ण बहुमत मिलना संभव नहीं है यानी जो निर्दलीय लड़ रहे हैं उनमें से भी कुछ प्रत्याशी जीत दर्ज करा सकते हैं। पिछले दो चुनाव तक ब्राह्मणवाद हावी रहने जैसा कारण भी इस बार जोर पकड़ता नजर नहीं आ रहा क्योंकि पैनलों के साथ स्वतंत्र उम्मीद्वारों में भी ब्राह्मण हैं इसलिये सारे वोट किसी एक को ही मिल जाएं यह संभव नहीं। इस चुनाव में इस बार रात वाली पार्टियां से दोनों पैनल बचती रही हैं, दिन में खाने के आयोजन हो रहे हैं और 900 से अधिक जो सदस्य हैं वो दाल-बाफले-लड्डू की ऐसी सभी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं । जिस पैनल की पार्टी में जाते हैं उसके प्रत्याशियों से चर्चा में लड्डू जैसी मिठास घोलते रहते हैं भले ही मन में उन प्रत्याशियों (जो पहले पदाधिकारी रह चुके हैं) को लेकर मन में कड़ुवाहट ही क्यों ना हो।माना जा रहा है कि करीब 700 सदस्य मतदान करेंगे। इनमें मुख्य पद अध्यक्ष, महासचिव के लिए अधिकतम 300 मत पर जीत तय हो सकती है। यही कारण है कि किसी एक पैनल को पूर्ण बहुमत तो नहीं ही मिलना है।
▪️प्रमुख दैनिकों ने किनारा कर रखा है
इंदौर प्रेस क्लब की कभी गरिमा इतनी थी कि प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के पत्रकार ही अध्यक्ष, सचिव (अब महासचिव) जैसे मुख्य पदों का दायित्व संभालते थे।अब बदलाव ऐसा हो गया है कि बरसों पहले से दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश, इंदौर समाचार जैसे प्रमुख दैनिकों ने एक तरह से प्रेस क्लब चुनाव से किनारा कर लिया है। इन अखबारों के कोई पत्रकार चुनाव में शामिल नहीं होते और प्रबंधन यदि स्टॉफ को किसी प्रत्याशी के पक्ष में फतवा जारी कर भी दे तो उसका शत-प्रतिशत पालन भी नहीं होता।
▪️ हिंदी पत्रकारिता का तीर्थ
इंदौर प्रेस क्लब को हिंदी पत्रकारिता का तीर्थ माना जाता है। इसकी वजह यह कि दिल्ली में पहुंचे यहां के पत्रकारों ने अंग्रेजी अखबारों को भी कई अवसर पर सिखाया है कि पत्रकारिता क्या होती है। यही नहीं इंदौर से दिल्ली पहुंचे पत्रकार-संपादक प्रधानमंत्री की किचन केबिनेट का भी हिस्सा रहे हैं। जिन ऋषि तुल्य पत्रकारों ने देश में इंदौर की पत्रकारिता की धाक जमाई है उनमें राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी, डॉ वेदप्रताप वैदिक, अभय छजलानी, श्रवण गर्ग, शरद जोशी, संजीव आचार्य, अनिल जैन आदि के साथ इन्दौर प्रेस क्लब का नेतृत्व करने वाले सर्वश्री राहुल बारपुते, माणिकचंद्र वाजपेयी, कृष्णकुमार अष्ठाना, गोकुल शर्मा, जयकृष्ण गौड़, विद्याधर शुक्ला, ओमी खंडेलवाल, जीवन साहू, सतीश जोशी, विकास मिश्र, प्रवीण खारीवाल, अरविंद तिवारी रहे हैं।
▪️प्रेस क्लब का अपना कोई भवन नहीं
देश में इंदौर प्रेस क्लब की धाक कम नहीं रही है लेकिन इस क्लब का अपना कोई भवन नहीं है। संपूर्ण प्रापर्टी लोक निर्माण विभाग की है और प्रेस क्लब किराएदार है। इतने अध्यक्ष आए और चले गए प्रेस क्लब भवन के लिए शासन से जमीन के लिए ठोस पहल नहीं हो पाई, एक कारण यह भी रहा कि शहर से दूर जमीन मिल भी जाए तो क्या मतलब। एबी रोड पर प्रेस परिसर है, वहां अखबारों को जमीन आवंटित हुई है।
▪️ 1975 में तीस पत्रकारों ने सोचा था
इंदौर की पत्रकारिता के एक संगठन की परिकल्पना 1957 में 30 पत्रकारों ने की थी।
मभा हिन्दी साहित्य समिति के सभागार में प्रदेश के तात्कालिक शिक्षा मंत्री डॉ. शंकरदयाल शर्मा की अध्यक्षता, राज्य के तात्कालिक वित्तमंत्री मिश्रीलाल गंगवाल व नगर निगम इंदौर के तात्कालिक महापौर आरएन जुत्शी के आतिथ्य में इंदौर प्रेस क्लब का गठन किया गया। नगर निगम इंदौर के तात्कालिक जनसंपर्क अधिकारी महेन्द्र तिवारी प्रेस क्लब की तदर्थ समिति के संयोजक थे। अस्थाई रूप से प्रेस क्लब कार्यालय एवं गतिविधियों के लिए जूना राजवाड़ा स्थित सूचना विभाग के एक कक्ष को उपयोग में लिया गया।
उसी दौरान 19 मई 1962 को जब प्रेस क्लब ने अपने बीच तत्कालीन रक्षामंत्री कृष्ण मेनन को बुलाया तो कार्यक्रम मेडिकल कालेज के सभागार में रखा गया। स्थापना के दो माह उपरांत 1 जुलाई 1962 को प्रेस क्लब के प्रथम चुनाव हुए, जिसमें सर्वसम्मति से नईदुनिया के प्रधान सम्पादक राहुल बारपुते प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष बने और उनके नेतृत्व में 11 वर्ष तक प्रेस क्लब संचालित भी हुआ। प्रथम कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष अजित प्रसाद जैन, सचिव ओ.पी. तनेजा, संयुक्त सचिव महेन्द्र त्रिवेदी और कोषाध्यक्ष सुमन वर्मा बने।
कुछ वर्षों बाद 1 जनवरी 1965 को नगर निगम ने स्टेडियम में एक कमरा प्रेस क्लब को किराए पर दिया, जिसका किराया 11 रुपए प्रतिमाह हुआ करता था। एमटीएच कम्पाउंड स्थित वर्तमान भवन में जुलाई 1968 में प्रेस क्लब को मिला। जिसका किराया 216 रुपए प्रतिमाह था। कालांतर में तात्कालिक उप मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा के सहयोग से 1971 में इसी भवन को एक रुपए वार्षिक की लीज़ पर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल ने प्रेस क्लब को आवंटित कर दिया।तब से लीज वाले भवन में ही संचालित हो रहा है।
▪️हेमामालिनी को चाय पिलाकर रवाना कर दिया था !
मैंने एक जमाना वो भी देखा है देश का बड़े सा बड़ा नेता जब इंदौर यात्रा का कार्यक्रम बनाता था तो उनकी यह कोशिश भी रहती थी कि किसी तरह ‘प्रेस से मिलिये’ कार्यक्रम में आमंत्रित कर लिया जाए। ऐसा भी हुआ कि अभिनेत्री हेमा मालिनी समय पर नहीं पहुंची तो उनका अतिथि सत्कार तो किया लेकिन प्रेस से मिलिये कार्यक्रम नहीं हुआ। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी के साथ मंच पर कमांडो भी उनके आसपास खड़े हो गए थे तो उन्हें हॉल से बाहर बैठा दिया। यहां प्रेस से चर्चा का मतलब होता था देश भर में मीडिया कवरेज मिल जाना। प्रेस क्लब की गरिमा में गिरावट, वरिष्ठ पत्रकारों का प्रेस क्लब से मोह भंग होना जैसे कई कारण रहे हैं कि यहां प्रेस कांफ्रेंस करने वाले संगठन अगले दिन अखबार तलाशते हैं कि खबर कहीं छपी या नहीं।
▪️दो सौ सदस्यों की सदस्यता समाप्ति और आर्थिक अनियमितता का मुद्दा गरमाया हुआ है
इस बार चुनाव में अध्यक्ष तिवारी के नेतृत्व वाली समिति द्वारा दो सौ से अधिक सदस्यों की सदस्यता समाप्त किए जाने का, पूर्व अध्यक्ष खारीवाल द्वारा आर्थिक अनियमितता किए जाने जैसा मुद्दा गरमाया हुआ है। जब तक पैनल चुनाव लड़ती रही तब तक अध्यक्ष अपने स्तर पर ऐसे सभी सदस्यों की फीस जमा कराते रहे हैं, थोक में सदस्यता समाप्ति पहली बार की गई है। ‘चुन चुन कर बदला’ लेने से फोटोग्राफर और वीडियो जर्नलिस्ट इससे खासे नाराज हैं ।
इस बार अरविंद तिवारी चुनाव लड़ाने की भूमिका में हैं और अपना वर्चस्व अपरोक्ष रूप से कायम रखना चाहते हैं। दूसरी अहिल्या पेनल प्रत्याशियों की जीत की रणनीति (पूर्व महासचिव) नवनीत शुक्ला ने तय की है, वो तिवारी से अपनी पिछली हार का बदला अपने प्रत्याशियों को जिता कर लेना चाहते हैं। दो बार अध्यक्ष रहे प्रवीण खारीवाल का इस चुनाव में सीधा दखल इसलिये भी नहीं है कि स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष की हैसियत से साल भर में वो पत्रकारों के अध्ययन, उन्नयन, हिंदी पत्रकारिता आदि को लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर सतत कार्यक्रम करा कर इंदौर प्रेस क्लब से बड़ी लकीर खींचते रहे हैं।
▪️14 सितंबर को है मतदान
हायकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष रितेश ईनाणी मुख्य निर्वाचन अधिकारी हैं। रविवार 14 सितम्बर को सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक मतदान और उसके बाद मतगणना होगी। रात तक परिणाम घोषित हो जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक ये प्रत्याशी मैदान में हैं-
▪️अध्यक्ष पद हेतु
- श्री अंकुर जायसवाल
- श्री दीपक कर्दम
- श्री हेमन्त शर्मा
▪️उपाध्यक्ष पद हेतु – - श्री धर्मेश यशलहा
- श्री धीरज दुबे
- गोविंद शर्मा
- श्री पंकज दीक्षित
- सुश्री प्रियंका पाण्डे
- श्री संजय जोशी
- श्री संजय त्रिपाठी
▪️एक महासचिव पद हेतु – - श्री अभिलाष शुक्ला
- श्री अजय पौराणिक
- श्री पंकज शर्मा
- श्री प्रदीप जोशी
▪️एक सचिव पद हेतु – - श्री अभिषेक चेंडके
- श्री पंकज भारती
- श्रीमती रजनी खेतान मिश्रा
- श्री सोनू यादव
▪️एक कोषाध्यक्ष पद हेतु – - श्री अजीज खान
- श्री अखिल सोनी
- श्री मुकेश तिवारी
▪️एक महिला प्रतिनिधि
सुश्री खुशबू यादव
सुश्री पूनम शर्मा
सुश्री रानी तिवारी
▪️छह पद कार्यकारिणी सदस्य
श्री गोपाल झुनझुने
श्री जयसिंह रघुवंशी
श्री लक्ष्मीकांत पंडित
श्री श्रीमती ललिता गौड़
श्री मनीष मक्खर
श्री मनीष शर्मा
श्री मनोज दाधीच
श्री अभय तिवारी
श्री प्रमोद दीक्षित
श्री अजय चौहान
श्री शार्दुल राठौर
श्री अंशुल मुकाती
श्री श्याम काम्बले
श्री अरविंद रघुवंशी
श्री विजय प्रकाश भट्ट
श्री सुश्री भारती जोशी
श्री विनोद गोयल
श्री दिलीप मालवीय
शानदार, अवलोकन,,, विश्लेषण,, प्लस खबर सर