
नीलम पेड़ीवाल ‘विहाँगी’ जमशेदपुर
उपयोगी यह तरु बरगद नित,
छाया इसकी हम गदगद नित।।
वट इसका सुनाम है दूजा,
सारे करते इसकी पूजा।।
औषधि गुण से भरपूर विटप,
रोगों को करता दूर विटप।।
दुर्भिक्ष समय जीवित रहता,
मिलकर रहने को यह कहता।।
बरगद की छाया में बैठ शुद्ध हों,
ज्ञान प्राप्ति कर सभी बुद्ध हों।।
इसमें त्रिदेवों का वास शुभ,
गुण बहुतेरे यहीं रास शुभ।।
तरुवर बरगद का यह विशाल,
सबके वास्ते बनता मिसाल।।
शाखाएँ इसकी बड़ी-बड़ी,
सुख-समृद्धि इसमें जड़ी-जड़ी।।
बरगद की छाया के जैसे,
घर के बुजुर्ग होते वैसे।।
छत के नीचे मिलकर रहना,
सीख सुधोपम इससे गहना।।
सचमुच है यह बरगद महान,
सबको देखता एक समान।।
