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विशाल बरगद के पेड़ की छाँव में बैठे बुजुर्ग और परिवार

बरगद की छाँव

बरगद केवल एक विशाल वृक्ष नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आश्रय, ज्ञान, एकता और संस्कार का प्रतीक है। ‘बरगद की छाँव’ कविता इसी वृक्ष के महत्व और बुजुर्गों की छाया को खूबसूरती से जोड़ती है।

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पुराना बरगद का पेड़ 

रिक्त लटका झूला सावन में,
पुराने बरगद के पेड़ में,
ताक रहा है राह को —
ना जाने कब आएंगी बेटियाँ।
पूछ रहा है वो पुराना बरगद का पेड़ —
अब सावन में क्यों नहीं आतीं हैं बेटियाँ?

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