
अनामिका अर्श
शब्द घात से किसी का दिल मत तोड़…
या तो मौन रह, या फिर मीठा बोल…
सब यहीं धरा रह जाएगा…।
भावनाओं को दौलत से मत तौल…
तेरे हर कर्म पर है शिव की नज़र…
लाख पर्दों में छुप जा,
खुल जाएगी तेरी पोल…।
कृष्णमय सांवली सावन की बदरिया में रंग जा…
उतार फेंक अपनी बहुरूपिया का खोल…।
शिव की करुणा बरस रही है…
विचारों को विराम दे,
हृदय के द्वार खोल…।
मरने के बाद भी सबके दिलों में ज़िंदा रह…
‘अर्श’ जतन कर कुछ ऐसे अनमोल…।
