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मुर्दों की सभा में कर्मों का हिसाब दिखाती हिंदी कविता

 “मुर्दों की हुई सभा”

अगर मृत्यु के बाद इंसान अपने जीवन का हिसाब खुद देख सके, तो उसके पास क्या बचेगा—धन, दौलत, रिश्ते या केवल कर्म? “मुर्दों की हुई सभा” इसी सवाल के माध्यम से जीवन का गहरा सच सामने रखती है।

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शब्दघात

“शब्दघात” एक आध्यात्मिक और चिंतनशील कविता है, जो शब्दों की ताकत, मीठे व्यवहार, अच्छे कर्मों और इंसानियत का संदेश देती है। रचना याद दिलाती है कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए ऐसे कर्म करें जो मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में हमें जीवित रखें।

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