gulmohar
गलतियों से सीखते हुए आत्म-अन्वेषण करता व्यक्ति

गलतियाँ

शावर भकत ‘भवानी ‘ गलतियाँ भीसही होने या सही करने के लिएनैसर्गिक मार्गदर्शक बनकरस्व-पथ निर्माताबनने की ओर ले जाती हैं। विदित है किगलतियों के भय सेअकर्मण्य बने रहनागलतियों में ही विद्यमान होना है। वस्तुतः गलती नहीं करनानवीन सीखने की चेष्टा मात्र से भीपृथक हो जाना है। तर्कसंगत भी है कि गलतियाँकिए बिना सीखना असंभव है।…

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शब्दघात

“शब्दघात” एक आध्यात्मिक और चिंतनशील कविता है, जो शब्दों की ताकत, मीठे व्यवहार, अच्छे कर्मों और इंसानियत का संदेश देती है। रचना याद दिलाती है कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए ऐसे कर्म करें जो मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में हमें जीवित रखें।

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मन का डेमेंशिया

सोचो, हम क्या दे सकते हैं किसीको, बिना सोचे समझे। जीवन अस्थाई है, फिर भी हम उम्मीदों से जुड़े रहते हैं। स्वप्न, हादसे, बीमारियाँ, खुशी, दुख — सब चला जाता है, बस स्मृतियाँ रह जाती हैं। ये स्मृतियाँ अक्सर दूसरों के लिए शेष रहती हैं, हमारे लिए नहीं। डेमेंशिया जैसी बीमारी याददाश्त और भावनाओं को बदल देती है, हमें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ती है और प्रेम की ऊर्जा को कमजोर कर देती है। इसलिए बेहतर है कि हम दूसरों को उनके जैसे ही छोड़ दें, स्वयं के विचारों को बदलें और अपना बेस्ट दें ताकि हमारी स्मृतियाँ दूसरों के लिए यादगार बनें।

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जिसके सिर पर छांव नहीं थी… वो खुद सूरज बन गया”

फादर्स डे पर बच्चों ने मुझे बधाई दी, लेकिन मैं अपने पिता को कभी ‘हैप्पी फादर्स डे’ नहीं कह पाया। क्योंकि वो होते हुए भी कभी पिता जैसे नहीं रहे। ठोकरें लगीं, खुद ही संभला, खुद ही सीखा… शायद इसी में ज़िंदगी की असली सीख थी।”

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