
पूनमसिंह वत्सला, जमशेदपुर
तू वात्सल्य की पालनहारी है,
तू हर दुःख में सहनशील है।
तू हर कष्ट को हरने वाली है,
नारी तू! नारायणी स्वरूपा।
तू हर पीड़ा से परे है,
विनम्रता तेरी पहचान है।
तुझसे धरती स्वर्ग बनी है,
तेरे जैसा कोई न दूजा है।
नूतन सूरज-सा तेरा जीवन है,
नारी तू! नारायणी स्वरूपा।
तू हर कर्तव्य में पूर्ण है,
स्वयं की समझ से परिपूर्ण है।
तुझे समझना आसान नहीं,
तुझ-सा कोई मिल पाए नहीं।
नारी तू! नारायणी स्वरूपा।
तेरे आँचल की छाँव में,
मिलता सुकून शीतल-सा।
तू ज़िंदगी है हम सबकी,
तू किसी के घावों की मरहम है।
तू किसी की इज़्ज़त और सम्मान है,
नारी तू! नारायणी स्वरूपा।
तू कोमल है, कमजोर नहीं,
तू चिंगारी, शक्ति और त्याग है।
तू साहस और ममता का नूर है,
तुझसे प्रेरणा नित मिलती है।
संगम है तू परिवार का,
सृष्टि का सत्व बसा तुझमें।
तुझसे मुस्कान है जगत में,
मृत्यु भी तुझसे हारी है।
नारी तू! नारायणी स्वरूपा।
तू रौनक है, पर अबला नहीं,
तुझसे परिवार का अस्तित्व है।
तू सबला है, समर्थ है,
हर रूप में तू कोहिनूर है।
हर रूप में तू अनमोल है,
तेरे बिना सब अधूरा है।
नारी तू! नारायणी स्वरूपा।
