
अनिशा छेत्री, गंगटोक (पीएचडी स्कॉलर,सिक्किम यूनिवर्सिटी)
अगर बिखरना हो,
तो शिद्दत से बिखरना भी सीखो।
अगर मंज़िल बनाई है,
तो बुलंद रहना भी सीखो।
है अगर आशा
शिखर को छूने की,
तो हौसला रखना भी सीखो।
है अगर कुछ पाने की उम्मीद,
तो कुछ खोने का हुनर भी सीखो।
है अगर चाहत
उगते हुए सूरज को देखने की,
तो रात के अंधेरों का
सामना करना भी सीखो।
अगर रखते हो चाहत
मोती को पाने की,
तो सागर की गहराइयों में
डूबना भी सीखो।
है अगर कुछ अनोखा
करने की चाहत,
तो आलस छोड़
मेहनत करना भी सीखो।
क्योंकि इतिहास
खुद गवाह है
“जिसकी मेहनत, उसी की जीत।”
लेकिन आज अगर जीते हो,
तो कल
शिद्दत से हारना भी सीखो।
पर कोशिश न छोड़ने का
हुनर भी सीखते जाओ।
मुकम्मल होगी
तुम्हारी ही सफलता,
पर तब तक
अपनी किस्मत
खुद लिखते जाओ।

अप्रतीम रचना💐🌹