
शिल्पा सिन्हा, सुप्रसिद्ध लेखिका एवं वीएफएक्स इंजीनियर कोल्हापुर,
कुछ पतों के पते मिला नहीं करते,
कुछ ख़तों के जवाब आया नहीं करते।
मुड़ के देखा बहुत दूर तक हमने,
दम घुटने तक यूँ सताया नहीं करते।
कुछ देर, कुछ दूर तक साथ थे चले,
इश्क़ ऐसे अधूरा निभाया नहीं करते।
छुपाकर रखना आँखों में तूफ़ान सारे,
अपने ग़म ग़ैरों को बताया नहीं करते।
उसी जगह बार-बार जाया नहीं करते,
इंतज़ार में वक़्त यूँ जाया नहीं करते।
कुछ पतों के पते मिला नहीं करते,
कुछ ख़तों के जवाब आया नहीं करते…

Nice very touching
Poignant reflection on love, loss and longing in simple language. Beautiful depicted
बहुत ही शानदार
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– सुरेश परिहार