
एस.आर.हरनोत, प्रसिद्ध साहित्यकार, शिमला
युद्ध अंधा होता है
पर
सबसे पहले
अंधे होते हैं वो
जिनके भीतर होता है
युद्ध
वहां न धर्म होता है
न कोई प्यार
न ही कोई मित्रता
कोई अंतर नहीं रह जाता
बारूद और
नफरत में
सरहदों को बचाते हुए
उन सपूतों के जुनून
किसी भी घातक
हथियार से
हो जाते हैं बड़े
वहां जीवन से बड़ा
हो जाता है देश
एक और युद्ध होता है
किसी भी युद्ध से
भयावह
जिन्हें लड़ती रहती
माएं
पिता
पत्नियां
और छोटे छोटे बच्चे
भीतर ही भीतर
बिना कोई हथियार उठाए
युद्ध में
नहीं हारता कोई
न जीतता है
काश!
शांति के सभी मंत्र
यज्ञ और
आह्वान
हो जाते फलीभूत
हर तरफ हो जाता बसंत
बच्चे
फूलों के बागों में
तितलियों के पीछे पीछे
भागते थकते
कुछ पल
सो जाते
अपनी अपनी
मांओं की गोदी में
फिर तितलियां ही आकर
जगाती उन्हें
ले जाती अपने साथ
बिना सरहदों के
देश में।

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