Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
एक भारतीय महिला अकेले बैठी, चेहरे पर थकान और भीतर दबे भावों के साथ सोच में डूबी हुई

क्या हक है उसे ?

क्या मैं अपने लिए जी नहीं सकती? अपने लिए कुछ कर नहीं सकती?” यह सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि हर उस स्त्री की आवाज़ है जो चुप रहकर सब सहती रही। यह कविता उसके भीतर उठते दर्द, आत्मसम्मान और अपने हक के लिए जागती चेतना की सच्ची अभिव्यक्ति है।

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गहनों की बेड़ियों में बंधी हुई एक महिला, जो समाज में नारी की स्थिति और संघर्ष को दर्शाती है

अधूरी पहचान

“नारी का अस्तित्व बस इतना सा…” कविता समाज में नारी की वास्तविक स्थिति और उसके संघर्षों को उजागर करती है। यह रचना दर्शाती है कि कैसे नारी को कभी देवी तो कभी दासी बनाकर उसके अधिकारों को सीमित किया गया। यह कविता नारी सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का गहरा संदेश देती है।

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