कहाँ गए वो लोग

पुराने समय में लोग आपसी मान-सम्मान और पश्चाताप की भावना से भरे रहते थे। जब भी बात मान की आ जाती, तो वे तुरंत झुक जाते और मेल कर लेते। भाई आपस में चाहे कितना भी झगड़ लेते, लेकिन मातृ प्रेम के कारण तुरत ही एक हो जाते और थोड़ी देर रूठकर वापस घर लौट आते।

उस दौर में यदि पड़ोस की दीवारें भी खड़ी हो जातीं, तो लोग उचक-उचक कर झांकते और चूल्हा जलता देखकर आग मांग लेते। गलती हो जाने पर दिन-रात प्रायश्चित करके खुद को सुधारने का प्रयास करते। काली रातों में जब गीदड़ गुर्राते और कोई हल्की सी आवाज़ भी आती, तो गाँव के लोग तुरंत चौकन्ने होकर प्रहरी बन जाते।

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