gulmohar

मकाँ

एक जर्जर मकाँ खंडहर की तरह ढहता दिखाई देता है। कभी उसी छत के नीचे बच्चों की चहचहाहट गूँजती थी, माँ और बाबा की बातें घर को जीवंत बना देती थीं। आज वातावरण उदासी और रंजो-ग़म से भरा है, मानो साँसें भी उखड़-सी गई हों। दिल बार-बार उसी पुराने आशियाने को ढूँढता है, जहाँ अपनापन और जीवन की गर्माहट हुआ करती थी।

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