मतलबी रिश्तों की चुभन

मतलबी रिश्ते अक्सर शुरुआत में बहुत मीठे लगते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी परतें उतरने लगती हैं। लोग साथ तो देते हैं, लेकिन उनके कदमों के पीछे सुविधा छिपी होती है। वे मुस्कुराते ज़रूर हैं, पर मुस्कान में अपनापन नहीं. ज़रूरतों की परछाई बसती है। जब तक आप उनके काम आते हैं, वे आपके साथ रहते हैं; और जिस दिन आपका उपयोग समाप्त होता है, दूरी बढ़ने लगती है। ऐसे रिश्ते दिल तोड़ते हैं, लेकिन आँखें खोलना भी सिखाते हैं क्योंकि सच्चे लोग कम होते हैं, और वही जीवन के सबसे सुंदर किनारे होते हैं।

Read More

बगुलाभगत

तुमने मित्रता का हाथ बढ़ाया और मैंने उसे सच्चे मन से स्वीकार भी किया। यह अनुभव मुझे एक नई ख दे गया – कि हर नए मित्र को परखकर ही अपनाना चाहिए। तुम्हें यह भ्रम रहा कि तुम्हारी मित्रता मुझे जीवन भर अभिमान देगी, लेकिन धीरे-धीरे मैं समझने लगी कि मित्रता में स्वार्थ छिपा होता है और उसका सत्य अक्सर कटु होता है।
तुम्हारी खट्टी-मीठी बातें, दिखावे की आवभगत और गरिमामयी उपस्थिति मुझे किसी बगुला भगत से कम नहीं लगी। मेरी बेरंग जिंदगी में रंग भरने की तुम्हारी कोशिश झूठी थी, और प्रेम प्रसंगों की ठिठोली मेरी आस्था को भीतर ही भीतर जला रही थी। तुम्हारी झूठी तारीफें, बनावटी शानोशौकत और ऊँची-ऊँची बातें मेरी अस्मिता पर आघात कर रही थीं। मेरे कंधे तुम्हारे सपनों का बोझ ढोते रहे, और तुम्हारी प्रसिद्धि की लालसा मेरी आहुति को प्रश्नांकित करती रही। तब मैंने जाना कि तुम्हारी मित्रता सच में कफन जैसी सफेद और मौत जैसी ठंडी है।

Read More