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छुपते हुए ख्वाब…

आधी रात की खामोशी में बंद खिड़की से झाँकती रोशनी और दिल की अनकही बातों के बीच जन्म लेती है यह कविता। कहीं स्पर्श की हल्की-सी सिहरन है, तो कहीं यमुना तट की लहरों संग खेलती मासूमियत। बाग-बगीचों से लेकर तारों भरी रात तक कवि का मन बार-बार उसी भटकते, अविरल प्रेम की ओर लौटता है, जिसे कहने की चाह तो है, पर कह न पाने की झिझक भी उतनी ही गहरी।

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नैनों के दर्पण में

“नैनों के दर्पण में तेरी तस्वीर उभरती है, तेरे बिना हर पल वीरान लगता है। तेरी यादों का जादू मेरे दिल में बसा है, और तेरी खुशबू हवाओं में घुलकर मेरी दुनिया को रंगीन बना देती है।”

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