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एक उदास महिला खिड़की के पास बैठी है, आंखों में आँसू, हाथ में पुरानी चिट्ठी, धुंधली रोशनी में प्रेम और विरह की भावना झलकती हुई।

इश्क़ की इंतहा

राँची, झारखंड की कवयित्री अर्पणा सिंह की यह मार्मिक ग़ज़ल प्रेम, विरह, तड़प और आत्मिक समर्पण की गहराइयों को उजागर करती है। “ज़िंदगी में तुम नहीं तो ज़िंदगी कुछ भी नहीं” पंक्ति के माध्यम से प्रेम की पूर्णता और विरह की पीड़ा का संवेदनशील चित्रण किया गया है।

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