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फ़िरोज़ी मफ़लर

नवंबर की पीली शामों में अकेले बाहर न निकलो। इस महीने की धूप छलावा है—तुम उसकी गुनगुनी ऊँगली पकड़कर चलते रहोगे, और वह अचानक किसी और के साथ भाग जाएगी। फिर तुम्हें रास्ता भी नहीं मिलेगा, क्योंकि सूखे पत्तों के बीच हमेशा हरे-भरे पत्ते खो जाते हैं।

ठहरो… कहा तो था कि हम तुम्हारे साथ चलेंगे। पिछले बरस का तुम्हारा अधूरा फ़िरोज़ी मफलर अब बुनाई के अंतिम मोड़ पर है। आओ, मिलकर सर्दियों की तैयारियाँ करें—हम दोनों साथ।

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जिंदगी और कट चाय

पल-पल बीतते जा रहे हैं, और जीवन का रस धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। इसलिए बेकार की बातें छोड़कर मौजूदा समय का आनंद लेना चाहिए। मित्रों के साथ बिताए गए पल, उनकी हँसी, कभी-कभी उनके आँसुओं की चिंता, और साथ में पी गई चाय—ये सब छोटी-छोटी खुशियाँ जीवन को पूर्ण बनाती हैं। यह कविता समय की अनवरत गति, मित्रता, साधारण सुख और जीवन के क्षणों की क़ीमत का स्मरण कराती है।

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