दीवार के उस पार..
एक मासूम बच्चा सिर्फ एक सुंदर बिल्डिंग को छूना चाहता था, लेकिन समाज ने उसे “चोर” कहकर थप्पड़ दे दिया। यह कहानी गरीबी, स्वाभिमान और सपनों के बीच खड़ी अदृश्य दीवारों की मार्मिक सच्चाई को उजागर करती है।

एक मासूम बच्चा सिर्फ एक सुंदर बिल्डिंग को छूना चाहता था, लेकिन समाज ने उसे “चोर” कहकर थप्पड़ दे दिया। यह कहानी गरीबी, स्वाभिमान और सपनों के बीच खड़ी अदृश्य दीवारों की मार्मिक सच्चाई को उजागर करती है।
श्रीमती शकुंतला बोहरा के नेत्रदान ने शोक की घड़ी को मानवता के उजाले में बदल दिया। यह भावुक कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार ने अपने निजी दुःख को दो अनजान ज़िंदगियों की रोशनी बना दिया और समाज के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।