Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

चीत्कार पर मौन है ज़माना

आज की राजनीति और सत्ता की भूख इतनी बेकाबू हो चुकी है कि उसने जनता की रोटी, ज़मीन और नौकरी तक निगल ली है। शासक वर्ग सबकुछ हड़पने के बाद भी संतुष्ट नहीं होता, मानो उन्हें किसी डकार तक की परवाह नहीं। आम इंसान का संघर्ष, उसका भूख-प्यास से जूझना, उनके लिए महज़ एक आँकड़ा या ख़बर बनकर रह गया है।

Read More

 समानता का दावा 

हमारे समाज में बराबरी का दावा तो बहुत किया जाता है, मगर हकीकत कुछ और ही है। एक ओर बेटों की चाह में बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है, तो दूसरी ओर दहेज के लिए उन्हें जलाया जाता है। बलात्कारियों को बचाने की कोशिश की जाती है, जबकि पीड़िताओं से कठोर सवाल पूछे जाते हैं।

Read More