मुरलीधर की मुरली…

मुरलीधर की मुरली हमें यही सिखाती है कि जीवन में प्रेम-भक्ति में मगन रहो। हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि हमने किस हेतु जन्म लिया और अपने विचारों को पावन बनाए रखना चाहिए। जीवन की यह कर्मभूमि सत्कर्मों के लिए है, और हमें चर और अचर दोनों का ध्यान रखना चाहिए। धन-दौलत तो आनी-जानी है, लेकिन सत्य को मानकर मगन रहना आवश्यक है।

संयम और धीरज बनाए रखना चाहिए, धर्म की बातों में निष्पक्ष होना चाहिए। जीवन के संघर्षों में आगे बढ़ते हुए सुंदर मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। अपने आत्म-विवेचन से दृढ़ प्रतिज्ञ बनो और हमेशा मगन रहो।

विद्या सबसे बड़ा धन है, और जीवन में सम्मत व्यवहार करना चाहिए। संयम और अदम्य साहस से अपने संघर्षों का समाधान करना चाहिए और संस्कृति के सहोदर बनकर जीवन जीना चाहिए।

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नारी शक्ति

नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्राचीन काल से ही सीता, गार्गी, सावित्री और अपाला जैसी नारियों ने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से समाज को नई दिशा दी। मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर और बेगम हजरत महल जैसी वीरांगनाओं ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि नारी किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं।
आधुनिक युग में भी नारी ने हर क्षेत्र—विज्ञान, राजनीति, कला, खेल और व्यापार—में सफलता के झंडे गाड़े हैं। कल्पना चावला, किरण बेदी, सुनीता विलियम्स और मैरी कॉम जैसी प्रेरणादायी महिलाएँ इसका प्रमाण हैं।

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सूरीनाम हिन्दी परिषद् का 48वाँ वार्षिकोत्सव उत्साहपूर्वक संपन्न

हिन्दी भाषण प्रतियोगिता व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन सूरीनाम हिन्दी परिषद् का 48वाँ स्थापना दिवस एवं हिन्दी पखवाड़े का शुभारंभ पाँच सितंबर को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर “हिन्दी भाषण प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी वक्तृत्व कला से श्रोताओं को प्रभावित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री करन जागेसर…

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कर्म की सीख…

सफलता आस्था को और प्रबल कर देती है . पंडित जी ने दोनों के जन्मांक देखें और पहले लड़के से कहा – कि वह इस बार अवश्य अधिकारी बन जाएगा और दूसरे लड़के से कहा- तुम्हारे ग्रह नक्षत्र कमजोर हैं, इसलिए तुम्हें किसी अन्य व्यवसाय पर ध्यान देना चाहिए.
१० वर्ष की आस्था भविष्य के आकलन को समझ नहीं पाती, परंतु वह दादा से कहती है कि मेरे विद्यालय में यह बताया जाता है, कि परिश्रम से भाग्य बनता है .आप सभी को परिश्रम से विमुख क्यों कर रहे हो?

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