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 औरत…

औरत अपने भीतर अनगिनत भावों और संवेदनाओं को समेटती है। उसकी आँखों में उफनते समंदर को वह बाँध देती है, और दिल में उमड़ने वाले सैलाब को रोक लेती है। उसके ज़ेहन में कई विचार घूमते हैं, नस-नस में खामोशी दौड़ती है, और कश्मकश में उसकी रातें बेहिसाब बीतती हैं।

जीवन में आए पुरुष – पिता, भाई, पति या बेटा – उनके दुख, दर्द, बुराइयाँ, कहानियाँ और कई राज़ वह अपने सीने में दफ़्न कर लेती है। इतने सब कुछ होने के बावजूद, समाज अक्सर यह कहता है कि औरत के पेट में कोई बात नहीं छिपती। लेकिन सच यह है कि औरत अपने भीतर पूरा ब्रह्मांड समेटे हुए है।

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