साहित्य ग़ज़ल LIVE WIRE NEWS NETWORK1 year ago1 year ago01 mins प्यार से लबरेज़ दुनिया में कोई गर दिल न हो तब तो ये दुनिया भी शायद रहने के क़ाबिल न हो सूना सूना भूतिया सा मुझको लगता अपना घर जब तलक आँगन में कोई बच्चों की खिल खिल न हो बस चले जाना ही हर दिन आदमी का शग़्ल है कोई दिन उसका न होता… Read More