चाँदनी में खोया दिल

आज की रात चाँदनी बहुत मतवाली है। चाँद भी मानो सोच रहा हो कि उसकी तो अपनी दीवाली है। साँझ ढलते ही माँ घर में चुप हैं और सोच रही हैं कि अपने परिवार के लिए क्या पकाएँ, क्योंकि रोटी का तवा खाली है। वहीं हमदम भी यह सोच रहा है कि आस-पास बिखरा लाल रंग उसकी प्रिय की लाली का प्रतीक है। मैं जब उसे देखता हूँ, तो महसूस करता हूँ कि खुद को ही भूल गया हूँ। ‘कनक’ अब इश्क़ में कंगाल हो चुका है, लेकिन यह मतवाली चाँदनी और प्रेम की लाली सब कुछ बयां कर देती है।

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सबके हृदय को भाया सावन

सावन का महीना आते ही प्रकृति खिल उठी है। बादल रिमझिम बरस रहे हैं और मोर अपने पंख फैलाकर नाच रहे हैं। बिजली की चमक आकाश को दमका देती है। बच्चे हर्षित हैं, क्योंकि सावन का मौसम लौट आया है। घर-घर में पूड़ी, कचौड़ी और पकोड़ी बन रही हैं, चटनी के साथ इनका स्वाद और बढ़ जाता है। झरनों पर सैर-सपाटा करने का आनंद है और सब मिलकर झूमते-नाचते हैं।
खेतों में फसलें लहराकर हरियाली फैला रही हैं, फूलों की बहार मन को मोह लेती है। नीम और बरगद पर झूले पड़ गए हैं, जिन पर बच्चे और बड़े सभी झूलते हुए खुशी से भर उठते हैं। मिट्टी की भीनी-भीनी महक और पक्षियों की मधुर चहचहाहट वातावरण को और सुहाना बना देती है। प्रकृति का यह रूप सचमुच मनभावन है और हर दिल को भा जाता है।

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