मुरलीधर की मुरली…

मुरलीधर की मुरली हमें यही सिखाती है कि जीवन में प्रेम-भक्ति में मगन रहो। हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि हमने किस हेतु जन्म लिया और अपने विचारों को पावन बनाए रखना चाहिए। जीवन की यह कर्मभूमि सत्कर्मों के लिए है, और हमें चर और अचर दोनों का ध्यान रखना चाहिए। धन-दौलत तो आनी-जानी है, लेकिन सत्य को मानकर मगन रहना आवश्यक है।

संयम और धीरज बनाए रखना चाहिए, धर्म की बातों में निष्पक्ष होना चाहिए। जीवन के संघर्षों में आगे बढ़ते हुए सुंदर मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। अपने आत्म-विवेचन से दृढ़ प्रतिज्ञ बनो और हमेशा मगन रहो।

विद्या सबसे बड़ा धन है, और जीवन में सम्मत व्यवहार करना चाहिए। संयम और अदम्य साहस से अपने संघर्षों का समाधान करना चाहिए और संस्कृति के सहोदर बनकर जीवन जीना चाहिए।

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 विश्वास…

जब व्यक्ति अपने विवेक पर अटूट विश्वास रखता है और परिस्थितियों से लड़ने का साहस जुटाता है, तब वह कठिन परिश्रम और अनुशासन के पालन से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। धैर्य और आशा का संबल, असफलताओं से न घबराना और सही दिशा में सतत प्रयास करना सफलता की गारंटी बनते हैं। समयबद्धता का सम्मान, ज्ञान पर भरोसा और हौसला बनाए रखना, मुश्किल घड़ियों में भी व्यक्ति को झुकने नहीं देता। अच्छे कर्मों से व्यक्ति का नाम रोशन होता है, और जब लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहता है, तो सफलता की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।

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