लालटेन
गाँव की छोटी-सी झोंपड़ियों और ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों को उजागर करती है। अँधियारे में एक मृतप्राय दीपशिखा की तरह जीवन की झलक कहीं तहखाने में बंद पड़ी है। नेता केवल दिखावे के लिए चमक-धमक करते हैं, पर जब बत्ती बुझी होती है तो लालटेन भी घर को रोशन नहीं कर सकती। इसके बावजूद, झोपड़ी में रहने वाले कृशकाय लोग रातों को इस छोटी डिबरी-सी लालटेन की रौशनी से जीवन की आशा और संघर्ष को देख पाते हैं। यह कविता सामाजिक असमानता, संघर्ष और छोटे प्रकाश की महत्वता को सुंदर ढंग से चित्रित करती है।
