Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

तू ही मेरा श्रृंगार

सविता सिंह मीरा, प्रसिद्ध कवयित्री, जमशेदपुर संस्कार, सदाचार,विचार, आचार —तू ही मेरा श्रृंगार। अलंकार, उपहार,आकार, निराकार —सब तेरे ही हैं प्रकार। नदी, पोखर, ताल, तलैया,तू ही सबकी खेवईया।शाखा, वल्लरी, द्रुम, लता,प्रकृति की सुंदर छटा।वर्षा, ओस, बादल, घटा,खग, मृग, बाल गोपाल,राम, केशव, नंदलाल। धूप, छाँव, अंबर, धरा —यह सब तो तेरे हैं रूप।तू ना हो तो…

Read More

मैं और मेरी हिंदी

जब से मैंने हिंदी लेखन शुरू किया है, कई हिंदी के धुरंधरों की तीखी नज़रों से नज़र बचाते हुए घूम रहा हूँ। उन्हें ऐसा लगने लगा है कि मैंने उनका एकाधिकार छीन लिया है। मैं, जो अंग्रेज़ी दवा का डॉक्टर होकर सारी ज़िंदगी फिरंगी भाषा की चाकरी में लगा रहा, अब अचानक हिंदी भाषा में लिखने का क्या चस्का लग गया?
फेसबुक पर मेरे एक पुरातात्विक-कालीन हिंदी के गुरुजी जुड़े हुए हैं, जो मेरे हर एक लेख को बारीकी से देखते हैं। मुझे लगता है कि मेग्निफाइंग ग्लास का प्रयोग करते होंगे। ऐसा नहीं लगता कि मोबाइल में फॉण्ट को उँगलियों से ज़ूम करना भी उन्हें आता होगा! हमें ऐसा लगता है जैसे हम वापस स्कूल में आ गए हैं।

Read More

हिन्दी दिवस बीत जाए

हिंदी स्वयं को एक दिन की रानी और भाषाओं की नानी कहती है। उसकी बहन उर्दू है, जिसके साथ उसे सदा बने रहना है। हिंदी चाहती है कि वह फूले-फले और खूब आगे बढ़े। वह आग्रह करती है कि लोग उसे सिर्फ उसके दिवस पर ही नहीं, बल्कि हर दिन याद करें, पढ़ें और लिखें।

Read More

आन है हिंदी

हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि देश का सम्मान और अभिमान है। इसमें प्रेम बसता है, स्वरों की मधुर तान गूंजती है और हर शब्द अपनी सरस लय से हृदय को छू लेता है। यह हमारी सभ्यता और सरल आचरण की पहचान है, जो चरित्र को निखारती और राष्ट्र की शान को बढ़ाती है। हिंदी के बिना ज्ञान अधूरा है, इसलिए इसे सदा सर्वोपरि रखना ही हमारा कर्तव्य है।

Read More