Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

लिहाफ़ : कहानी जो सुनी थी…

पूस की रात, पतले लिहाफ़ और भूख से जूझते एक परिवार की कहानी में ठंड, गरीबी और संघर्ष के बीच भी उम्मीद की रोशनी झलकती है। जब रिक्शा चला कर लाया गया आटा-दाल और मुनिया की मुस्कान से ढेबरी से ज़्यादा रौशनी उनकी झोपड़ी में फैलती है, तो यह कहानी केवल ठंड की नहीं, जुगत और जज़्बे की भी बन जाती है।

Read More

“जहां से मैं शुरू हुई, वहां मैं नहीं रुकी”

प्रभा ने जीवन भर त्याग और समर्पण सीखा, लेकिन जब अपनी बेटी की बातों ने उसे आईना दिखाया, तो उसने खुद के अस्तित्व की तलाश शुरू की। आज, वह सिर्फ किसी की पत्नी या बहू नहीं, बल्कि एक शिक्षिका, एक मार्गदर्शक और एक सफल स्त्री है — अपनी पहचान के साथ।”

Read More

भय

“अब का भूल जाओ सब और अपनी छोटी बेटी पर ध्यान दो” — कहकर मातादीन छोटे ठाकुर की गाड़ी चलाने चला गया। राधा की मौत से टूटा, मगर डर से बंधा बाप अपने आंसू निगल गया। ये सिर्फ़ एक बेटी की कहानी नहीं, पूरे सिस्टम की चुप्पी की चीख़ है, जहां ज़िंदगी से ज्यादा बड़ी होती है रोटी की मजबूरी और डर।

Read More
गांव के आंगन में एक लड़की चाय का कप पकड़े, सामने भावुक खड़ा एक युवक, हल्की धूप और भावनात्मक माहौल

अधूरी चाय, अधूरा इश्क़

चाय को ना नहीं बोलते साहब, पाप लगता है…” — और इस मासूम से वाक्य ने मोहित की ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी। वर्षों बाद जब वही चाय की खुशबू और वही बात एक नन्हीं बच्ची ने दोहराई, तो अधूरी कहानी को एक नया अंत मिल गया।

Read More