हरसिंगार धरा पर बिखर गई
हरसिंगार के धरा पर झरने को आधार बनाकर रची गई यह कविता स्नेह, समर्पण और आश्रय की तलाश को बेहद संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है।

हरसिंगार के धरा पर झरने को आधार बनाकर रची गई यह कविता स्नेह, समर्पण और आश्रय की तलाश को बेहद संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है।