भगवान हनुमान भक्तों को आशीर्वाद देते हुए, परिवार की रक्षा करते हुए

संकटमोचन हनुमान

हनुमान जी को माता-पिता समान मानकर यह कविता उनके संरक्षण, दया और शक्ति की प्रार्थना करती है, जहां भक्त जीवन के दुखों से पार लगाने की विनती करता है.

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