जब तक शिष्टाचार जीवित, समाज भी जीवित

Give and Take की थ्योरी एक सरल लेकिन गहराई से भरी जीवन-दृष्टि है, जो न सिर्फ हमारे व्यक्तिगत संबंधों को परिभाषित करती है, बल्कि हमारे सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी अहम भूमिका निभाती है। फिर चाहे वह मान – सम्मान,स्नेह हो या नफ़रत …..।
वैसे तो आज के समय में यदि हम अपने चारों ओर नज़र डालें, तो एक स्पष्ट और चिंताजनक परिवर्तन दिखाई देता है — शिष्टाचार की कमी। वह विनम्रता, वह ‘कृपया’, ‘धन्यवाद’, और ‘माफ कीजिए’ जैसे शब्द अब धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं। एक समय था जब बड़ों का सम्मान, छोटों पर स्नेह, और अजनबियों के प्रति भी आदर का भाव समाज की आत्मा हुआ करता था।

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