विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड़ लगाते लोग, हरित प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता यथार्थवादी दृश्य।

प्रकृति बदला नहीं लेती, केवल हिसाब बराबर करती है

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रस्तुत यह लेख प्रकृति और मानव के संबंधों पर गंभीर चिंतन करता है। इसमें बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वृक्षों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताया गया है। लेख यह संदेश देता है कि प्रकृति बदला नहीं लेती, बल्कि समय आने पर अपने साथ किए गए व्यवहार का हिसाब बराबर करती है।

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अरावली : सभ्यता, प्रकृति और भविष्य की पुकार

अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ नहीं, बल्कि भारत की सबसे पुरानी प्राकृतिक धरोहर और पर्यावरणीय सुरक्षा कवच है। नीतिगत परिभाषाओं के नाम पर यदि इसे कानूनी संरक्षण से बाहर किया गया, तो अवैध खनन, जल संकट और मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ेगा। अरावली को बचाना आज केवल पर्यावरण नहीं, देश के भविष्य को बचाने का सवाल है।

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सीकर में बजाज ट्रस्ट के ध्येय महोत्सव का भव्य शुभारंभ

राजस्थान के सीकर में सातवें “ध्येय महोत्सव” का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में ग्रामीण विकास, फसल विविधीकरण, बागवानी और आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण पर विचार साझा किए गए। बजाज फाउंडेशन, जमनालाल कनिराम बजाज ट्रस्ट और विश्व युवक केंद्र के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव ग्रामीण सशक्तिकरण और सतत विकास के लिए प्रेरक मंच बन गया। आगामी दिनों में कार्यशालाएँ और फील्ड विज़िट्स आयोजित की जाएँगी।

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